प्रयागराज। प्रदेशभर के आईटीआई और सेवायोजन कार्यालयों में अनियमित नियुक्ति में से पदोन्नत होकर 40 कर्मचारी प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय में तैनात हो गए हैं। 14 वर्ष पहले इन सभी की नियुक्ति निरस्त करने के लिए निदेशक ने संस्तुति कर दी गई थी। निदेशालय पहुंचे कर्मचारियों ने कार्यवाही की फाइल दबा दी है। इसलिए अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है।
2003 से 2006 तक निदेशक डॉ. गुरुदीप सिंह, अपर निदेशक दिलीप कुमार, आईटीआई के 20 प्रधानाचायों व क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारियों ने समूह ग और घ के पदों पर 438 लोगों की अनियमित तरीके से नियुक्ति की
थी। 2010 में निदेशक हरिशंकर पांडेय ने जांच करवाई और इन नियुक्तियों को निरस्त करने की संस्तुति की थी। साथ ही अफसरों पर कार्रवाई का निर्देश दिया था। उसके बावजूद विभागीय अफसरों की मिलीभगत से किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा इन सभी को पदोन्नति दे दी गई।
पदोन्नति के बाद कइयों का स्थानांतरण कर दिया गया। 40 लोगों को निदेशालय में स्थानांतरण कर दिया गया। कार्यवाही निदेशालय से होनी थी, लेकिन अनियमित नियुक्ति वाले कर्मचारियों की वहां पर तैनाती के बाद से प्रक्रिया रुक गई। इस भर्ती के जरिये प्रदेश के लगभग सभी जिलों में कर्मचारी तैनात हैं। उनके वेतन पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।
चौकीदार से भर्ती हुए अब प्रधान
सहायक बन गए
2005 में आईटीआई मथुरा में चौकीदार के पद पर वीरेंद्र सोनकर भर्ती हुए। अफसरों की इन पर ऐसी मेहरबानी कि 2011 में उन्हें प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय लखनऊ में स्थानांतरित किया और प्रधान सहायक बना दिया। ऐसे ही 2005 में ही चौकीदार पद पर कानपुर में सुरेश सिंह, बरेली में अमित यादव, लखीमपुर खीरी में ब्रजेश चौधरी, मथुरा में इमरान अहमद, सत्येंद्र की नियुक्ति हुई। कुछ वर्षों बाद उन्हें प्रधान सहायक बनाकर निदेशालय में तैनात कर दिया गया। इसके अलावा उसी दौरान कनिष्ठ सहायक पद पर फतेहगढ़ प्रदीप सिंह, कानपुर में मृत्युंजय त्रिपाठी, कुमुद लता सिंह,
नीना सिंह, मथुरा में सलिल दीक्षित, मेरठ संदीप बाजपेई, मनीष चंद्र, आगरा में आदित्य शेखर अवस्थी आदि की नियुक्ति। उनको प्रधान सहायक बनाकर निदेशालय में तैनात कर दिया गया है। इनको नियुक्ति और पदोन्नति के खिलाफ भी
इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता सुनील गुप्ता ने बताया कि फर्जी भर्ती के आरोपित अधिकारी कर्मचारी निदेशालय में तैनात है, इसलिए कार्रवाई नहीं हो रही।।
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