अमरोहा। परिषदीय स्कूलों में प्री प्राइमरी से कक्षा दो तक के विद्यार्थियों को गणित और भाषा में दक्ष बनाने के लिए निपुण भारत मिशन चलाया जा रहा है। जिसमें बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास है। अब
इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। बीईओ, डायट मॅटर, स्पेशल रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी) एवं शिक्षक संकुल को भी अब विद्यालयों को निपुण बनाने का दायित्व दिया गया है।
जिले में 1266 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें करीब एक लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। लेकिन, स्कूलों में प्री-प्राइमरी से
कक्षा दो तक के विद्यार्थियों पर विशेष जोर है। अब बीईओ को ब्लॉक संसाधन केंद्र या फिर उनके कार्यालय के पास स्थित विद्यालय को निपुण बनाना होगा।
वह प्राथमिक स्कूल या फिर कंपोजिट विद्यालय में से किसी भी विद्यालय का जिम्मा लेंगे। जिले में छह ब्लॉक हैं, सभी बीईओ यह जिम्मेदारी लेंगे। डायट मेंटर को किसी भी ब्लॉक का विद्यालय आवंटित किया जाएगा। प्रत्येक
ब्लॉक में एक डायट मेंटर है। न्याय पंचायत स्तर पर पांच-पांच शिक्षकों को संकुल शिक्षक बनाया गया है। स्पेशल रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी) को भी अपने मूल विद्यालय को निपुण बनाने का जिम्मा दिया जाएगा। यह सभी एक-एक विद्यालय की जिम्मेदारी लेंगे। इसके अलावा (एआरपी) एकेडमिक रिसोर्स पर्सन को अपने ब्लॉक के 10 विद्यालयों को निपुण बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर नई गाइड लाइन जारी की गई है। जिसमें मार्च 2025 तक ही अधिक से अधिक विद्यालयों को निपुण बनाए जाने का लक्ष्य दिया गया है। जिसके तहत शिक्षकों के साथ- साथ बीईओ, डायट मॅटर, एसआरजी, एआरपी, और शिक्षक संकुल की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। डॉ. मोनिका, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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