कर्मचारियों के सिर का ताज है पेंशन

primarymaster.in


 हिमाचल प्रदेश के सेवानिवृत्त शिक्षक चिंतराम शास्त्री न्यू पेंशन स्कीम से पुरानी पेंशन स्कीम के अंतर्गत आने वाले पहले लाभार्थी बनते ही घरेलु आर्थिक चिंताओं से मुक्त हो गए हैं। न्यू पेंशन स्कीम के अंतर्गत उन्हें पिछले छह साल से 1770 रुपये मासिक पेंशन मिल रही थी, वहीं अब पुरानी पेंशन स्कीम में आने के बाद उनकी मासिक पेंशन 36850 हो गई है। एनपीईएसए के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर का कहना है कि यह सिर्फ पेंशन की बात नहीं है बल्कि ये सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा फैसला है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर व न्यायाधीश विपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने भी एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन कोई इनाम या अहसान नहीं है बल्कि यह कर्मचारियों द्वारा की गई लंबी और संतोषजनक सेवा प्रदान करने के बाद अर्जित की जाती है। आखिर पेंशन की आवश्यकता क्यों ? सवाल के जवाब में यह सर्वविदित तथ्य है कि बढ़ती आयु के साथ-साथ युवाओं की तुलना में व्यक्ति की उत्पादकता घटती जाती है। एकल परिवार होने से शिक्षा एवं नौकरी के चलते परिवार के सदस्यों को देश-विदेश जाना पड़ता है। निरंतर जीवनयापन के खचों में वृद्धि और लम्बे जीवनकाल आदि कारणों की वजह से गारंटीशुदा मासिक आय सम्मानजनक

जीवनयापन की गारंटी देती है।

पंद्रहवें सालाना मर्सर सीएफए इंस्टीट्यूट ग्लोबल पेंशन इंडेक्स (एमसीजीपीआई) के अनुसार भारत का पेंशन सूचकांक मूल्य 2022 में 44.5 से बढ़कर इस साल 45.9 हो गया। लेकिन फिर भी इस आधार पर विश्लेषण में शामिल 47 पेंशन प्रणालियों वाले देशों में भारत 45 वें स्थान पर है। नीदरलैंड 85 के स्कोर के साथ शीर्ष पर है, उसके बाद आइसलैंड 83.5 के स्कोर के साथ दूसरे और डेनमार्क 81.3 के स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर है। जाहिर है सेवानिवृत कर्मचारियों की पेंशन को लेकर भारत सरकार को तत्काल आवश्यक उपाय करने की जरूरत है। इधर हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय समाचार पत्र दिव्य हिमाचल द्वारा कराए गए सर्वे में कि ‘क्या आगामी लोकसभा चुनावों में ओपीएस मुद्दा बनेगी’, इस पर 77 प्रतिशत लोगों ने ‘हां’ में जवाब दिया है। सिर्फ 20 प्रतिशत लोगों ने ओपीएस को मुद्दा मानने से इनकार किया। सर्वे में तीन प्रतिशत लोगों ने ‘पता नहीं’ में उत्तर दिया है। सर्वे में कुल 2074 लोगों ने अपनी राय दी थी। गत वर्ष दिसंबर 2022 में संपन्न हिमाचल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने पुरानी पेंशन को बड़ा मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा था और नई पेंशन योजना के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों ने भी अपने सुरक्षित भविष्य की खातिर अपने हक में वोटिंग की और नतीजा यह हुआ कि भाजपा की जयराम ठाकुर सरकार की हार हो गई। अब कुछ माह में लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इन चुनावों में भी ओल्ड पेंशन का मुद्दा निर्णायक भूमिका अदा करने वाला है। इसी महीने की 01 अक्टूबर को नई दिल्ली में ओपीएस के मसले पर करीब तीन लाख कर्मचारी देश भर से जुटे थे। हिमाचल की बात करें तो यहां एक लाख 35 हजार कर्मी अभी इसके दायरे में आए हैं, वहीं बिजली बोर्ड समेत कई अन्य बोर्डों एवं निगमों के कर्मी जल्द उन्हें भी ओपीएस के दायरे में लाने के लिए सरकार से मांग कर रहे हैं। पुरानी पेंशन बहाली एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सोशल मीडिया में कर्मचारियों में सबसे ज्यादा चर्चा होती है। 

कर्मचारियों के सिर का ताज है पेंशन

Rating: 4.5
Diposkan Oleh:
Updatemarts

Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA

Leave a Comment