लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोरोना काल में चुनाव ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कुछ सरकारी कर्मियों को अभी तक 30 लाख की अनुग्रह राशि नहीं दिए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ऐसे मामलों में मृतक कर्मी के परिजनों द्वारा न्यायालय में गुहार लगाने का गंभीर संज्ञान लेकर एक मामले में अपर मुख्य सचिव पंचायती राज को 18 दिसंबर को निजी जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। साथ ही ताकीद की कि अगर हलफनामा दाखिल नहीं हुआ तो एसीएस पंचायतीराज खुद रिकार्ड के साथ बुधवार को कोर्ट में पेश होंगे। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि प्रदेश में ऐसे कितने मामले हैं जिनमें अब तक अनुग्रह राशि नहीं दी गई है।
न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की एकल पीठ ने यह आदेश एक मृतक कर्मी की पत्नी उषा देवी की याचिका पर दिया। याची का कहना था कि उसके पति की मृत्यु कोविड काल में चुनाव ड्यूटी के दौरान हो गई थी। बस्ती के डीएम द्वारा 30 लाख रुपये बतौर अनुग्रह राशि देने की सिफारिश के बावजूद उसे अभी यह रकम नहीं दी गई। जबकि डीएम ने अपर मुख्य सचिव पंचायती राज को इसके लिए बजट उपलब्ध करवाने को पत्र भी भेजा था।
कोर्ट ने डीएम की सिफारिश के 9 माह बाद भी राशि का भुगतान न किए जाने को राज्य की शोचनीय स्थिति कहा। कोर्ट ने कहा ऐसे कई याचिकाएं दाखिल हो रही हैं, जिनमें सिफारिश के बावजूद मृतक कर्मियों के परिजनों को अनुग्रह राशि का भुगतान नहीं किया गया। जबकि, कल्याणकारी राज्य होने के नाते ऐसी सिफारिशों पर त्वरित कार्यवाही करके भुगतान करने की अपेक्षा राज्य सरकार से की जाती है।
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