लखनऊ। राजस्व निरीक्षकों को 750 रुपये स्टेशनरी भत्ता देने की तैयारी चल रही है। इस संबंध में राजस्व विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। इसमें कहा गया है कि अभी मात्र छह रुपये प्रति माह ही स्टेशनरी भत्ता दिया जा रहा है। राजस्व निरीक्षकों की मांग है कि 1000 रुपये हर माह भत्ता दिया जाए, लेकिन 750 रुपये देने का औचित्य पाया गया है।
अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त अनिल कुमार यादव की ओर से शासन को भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि राजस्व निरीक्षकों ने स्टेशनरी भत्ता
1000 रुपये और मोटरसाइकिल भत्ता 2000 रुपये देने की मांग की है। मोटर साइकिल भत्ता बढ़ाकर 2000 रुपये करने संबंधी प्रस्ताव शासन को पहले ही भेजा जा चुका है। अब स्टेशनरी भत्ता बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव भेजा गया है।
यहां बता दें कि पूर्व में उत्तर प्रदेश राजस्व निरीक्षक संघ के अध्यक्ष ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया था कि एक राजस्व निरीक्षक के क्षेत्र में लगभग 40 से 50 गांव होते हैं। राजस्व निरीक्षक को धारा-24 के
ऑनलाइन आवेदनों के प्रिंट निकलवाकर प्रतिवादियों को नोटिस भेजा जाता है। धारा-38 के मामलों में नक्शा तैयार करने, धारा 101 की पत्रावलियों पर आख्या अंकित करने पर पैसा खर्च होता है।
इसके अलावा आवास, कृषि, मत्स्य पालन, वृक्षारोपण, कुम्हारी कला आदि आवंटनों पर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाती है।
इन सभी कामों के लिए फोटो कॉपी कराना होता है। इसलिए इस पर अधिक खर्च आ रहा है। राजस्व परिषद स्तर से राजस्व निरीक्षकों को स्टेशनरी भत्ता 750 रुपये हर माह देने को औचित्यपूर्ण पाते हुए प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है।
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