भारतीय शिक्षा बोर्ड में मान्यता के लिए भविष्य में लगेंगी कतारें : डॉ. दिनेश शर्मा

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 लखनऊ। राजधानी में सोमवार को भारतीय शिक्षा बोर्ड की कॉन्फ्रेंस संपन्न हुई। पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं विख्यात शिक्षाविद् डॉ. दिनेश शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि अपने अभिभाषण में दावा किया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम और संयोजना ऐसा है कि इससे मान्यता लेने के लिए भविष्य में विद्यालय लाइन में लगेंगे।

भारतीय संस्कृति के अनुरूप शिक्षा प्रणाली बनाने के महाप्रयास में पतंजलि योगपीठ, भारतीय शिक्षा बोर्ड और चेयरमैन डॉ नागेंद्र प्रताप सिंह (पूर्व आईएएस) के योगदान की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित शिक्षा ने न केवल नैतिकता बल्कि पारिवारिक समन्वय और सौहार्द को भी समाप्त किया है।

कहा- पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित शिक्षा ने पारिवारिक समन्वय और सौहार्द को भी समाप्त किया

वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. सूर्यप्रकाश दीक्षित की अध्यक्षता में कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।

भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. नागेंद्र प्रताप सिंह ने उपस्थित शिक्षाविदों, विद्यालय प्रबंधकों और शिक्षकों को भारतीय शिक्षा बोर्ड के विषय में बताया। उन्होंने बताया कि आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा को भारतीय मूल्यबोध के मानकों के अनुरूप ढालने के लिए दो वर्ष में दो हजार

विद्वानों का सहयोग लिया गया है। इस बोर्ड की पाठ्यपुस्तकों में सरलीकृत भाषा में आधुनिक मानकों का ध्यान रखते हुए विद्यार्थियों का पंचकोश विकास करने का प्रयास किया गया है।

मंच पर भारतीय शिक्षा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक विंग कमांडर पुष्कल द्विवेदी (से) भी उपस्थित रहे, जिन्होंने सभी से अपील की कि किसी ना किसी रूप में शिक्षा के इस अभूतपूर्व महायज्ञ में अवश्य योगदान करें। कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ के रजनीश सिन्हा, सीबीएसई मैनेजर एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेश पचौरी, व्यापार सदन के प्रदीप अग्रवाल एवं भारतीय शिक्षा अनुसंधान परिषद के गौरव पांडे मणिकांत शुक्ला, आनंद सिंह, राजीव अरोड़ा, आनंद सिंह आदि उपस्थित रहे। ब्यूरो

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