किसी और के रोल नंबर पर बीएड की फर्जी डिग्री से सरकारी शिक्षिका बन गई, अब गई पकड़ी, 20 साल बाद खुली पोल

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 किसी और के रोल नंबर पर बीएड की फर्जी डिग्री से सरकारी शिक्षिका बन गई, अब गई पकड़ी, 20 साल बाद खुली पोल

जौनपुर, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की बीएड की फर्जी डिग्री लगाकर मिथिलेश कुमारी ने अंबेडकरनगर में शिक्षिका की नौकरी हासिल कर ली।

प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक भर्ती परीक्षा से पहले अभ्यर्थी की डिग्री को जांच के लिए विश्वविद्यालय के रिकाॅर्ड रूम में भेजा गया था, मगर वहां से बिना जांच-पड़ताल अनापत्ति दे गई। इस मामले में शिकायकर्ता प्रतिमा ने 50 बार राज्यपाल से लेकर कुलपति, डीएम तक शिकायत की। इसके बाद तीन सदस्यीय कमेटी की जांच में मामले का खुलासा हुआ।

जांच पता चला कि बलिया जिले का श्री मुरली मनोहर टाउन पीजी कॉलेज वर्ष 2006 में पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध था। वहां 2006 में आयोजित बीएड की परीक्षा में एक छात्र राजेश्वर कुशवाहा अनुपस्थित था। विश्वविद्यालय की टेबुलेशन प्रक्रिया के दौरान उसी अनुपस्थित छात्र का अनुक्रमांक (रोल नंबर) को आधार बनाकर मिथिलेश कुमारी निवासी नेहरू नगर, टांडा अंबेडकर नगर के नाम से मार्कशीट तैयार की गई। इस हेराफेरी में विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड रूम के कर्मियों की भूमिका है।

वहीं से मिथिलेश कुमारी के नाम से फर्जी अंकपत्र और डिग्री तैयार की गई। महिला को सरकारी नौकरी मिल गई।

वर्ष 2010 में उसने अंबेडकर नगर के प्राथमिक विद्यालय मुजाहिदपुर में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया। शिकायतकर्ता प्रतिमा के मुताबिक, उसने एक वर्ष में विश्वविद्यालय प्रशासन को 50 से अधिक शिकायती पत्र भेजे। हर बार प्रशासन ने गोपनीयता का हवाला देकर मामले को टाल दिया।

प्रतिमा ने राज्यपाल को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की, तब विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया। कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। मामले की जांच कराई। जांच कमेटी ने पाया कि मिथिलेश कुमारी के पास जो अंकपत्र और डिग्री फर्जी है। इसके बाद शिक्षिका का वेतन रोक दिया गया है।

समिति ने मिथिलेश कुमारी को जांच में अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया, लेकिन वह स्वयं नहीं आई। मिथिलेश की ओर से उनका पति समिति के समक्ष उपस्थित हुआ, जिसने टालमटोल और भ्रामक जवाब देकर समिति को भ्रमित करने का प्रयास किया। बाद में वहां से भाग गया।

वर्ष 2002 से 2008 तक और आ सकते हैं मामले : पूर्वांचल विश्वविद्यालय में फर्जी अंक पत्र व डिग्री के कई मामले सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2002 से 2008 तक विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों व शिक्षकों ने परिजनों व रिश्तेदारों को इसी तरह नौकरी दिलवाई है। मामले की जांच विश्वविद्यालय स्तर से कराई जाए ऐसे कई मामले सामने आएंगे। डॉ. विनोद कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक, पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने बताया किफर्जी अंकपत्र व डिग्री की जांच तीन सदस्यीय कमेटी विश्वविद्यालय स्तर पर कर रही है। जांच के प्रथम पहलू पर सभी अंक पत्र और डिग्री फर्जी पाए गए हैं। बयान के लिए विश्वविद्यालय में महिला को बुलाया गया था लेकिन वह अपना बयान दर्ज नहीं कराने नहीं आई। 

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