लखनऊः अब डीएलएड (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन) प्रशिक्षुओं को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उनकी रचनात्मकता भी बढ़ाई जाएगी। प्रदेश के सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में जल्द ही ‘ओपेन थिएटर’ की स्थापना की जाएगी, जहां प्रशिक्षु शिक्षक अपनी संवाद कला, नेतृत्व क्षमता, तर्कशक्ति और रचनात्मकता को खुलकर अभिव्यक्त कर सकेंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे संकोचवश अपनी समस्याएं व्यक्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे में यदि शिक्षक में संवाद कौशल और सहानुभूति होगी, तो वह न केवल पढ़ाएगा बल्कि बच्चों की मानसिक स्थिति को भी समझेगा। ओपेन थिएटर इन्हीं कौशलों को तराशने का जरिया बनेगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डा. पवन सचान
के अनुसार प्रशिक्षण के दौरान देखा गया कि कई प्रशिक्षु पढ़ाई के साथ गीत-संगीत, नाट्यकला, फोटोग्राफी और लेखन जैसी प्रतिभाओं में भी दक्ष होते हैं।
इन ओपेन थिएटर में ऐसे युवाओं को मंच मिलेगा, जिससे उनकी बहुआयामी प्रतिभा निखरेगी। हर सप्ताह सामाजिक, शैक्षिक या सामयिक मुद्दों पर आधारित प्रस्तुति दी जाएगी, जिससे प्रशिक्षुओं की साफ्ट स्किल्स जैसे संवाद क्षमता, टीम वर्क, आत्मविश्वास और नेतृत्व का विकास हो सके। विशेष ध्यान इस बात पर दिया जाएगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जाने वाले शिक्षक बच्चों से संवाद और परामर्श में कुशल हों।
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