इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केवल 15 जिलों में सहायक अध्यापकों के अंतरजनपदीय स्थानांतरण की अधिसूचना की वैधता की चुनौती देने वाली याचिका पर सचिव बेसिक शिक्षा परिषद से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि केवल 15 जिलों के सहायक अध्यापकों का स्थानांतरण विभेदकारी, मनमाना और याची के अधिकारों का हनन है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने श्रावस्ती में प्राथमिक विद्यालय की सहायक अधिवक्ता सत्वेद्र चंद्र त्रिपाठी को पर सुनकर दिया है।
एडवोकेट त्रिपाठी कहना है कि केवल 15 जिलों के सहायक अध्यापकों के स्थानांतरण से समायोजन की नीति मनमानी व विभेदकारी है। इसे रद्द किया जाना चाहिए। परिषद की ओर से कहा गया कि 15 जिलों में सहायक अध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए स्थानांतरण से समायोजन का आदेश दिया गया है ताकि अनिवार्य शिक्षा कानून का सही मायने में पालन हो सके। यह विभेदकारी नहीं है बल्कि विशेष कारण से ऐसा किया जा रहा है। कोर्ट ने परिषद को भेदभाव करने के मुद्दे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याची का कहना है कि वह गांव
फरुखाबाद के मंदना गांव की है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उसकी नियुक्ति 31 दिसंबर 2016 को कटही वागही प्राइमरी स्कूल आवस्ती में की है। वर्ष 2017 में उसकी शादी जूनियर हाईस्कूल में सहायक अध्यापक नीरज कुमार से हुई। पति हरदोई में तैनात थे। वर्ष 2021 में उनका स्थानांतरण फर्रुखाबाद कर दिया गया।
याची का कहना है कि ससुर का निधन हो चुका है और 68 वर्षीय सास उसके साथ रहती हैं। उसके जुड़वां बच्चे हैं। पति फर्रुखाबाद और वह आवस्ती में तैनात है। याची ने स्थानांतरण के लिए अर्जी दी है लेकिन कुछ जिलों को ही अंतरजनपदीय स्थानांतरण नीति में शामिल किया गया है, जो अन्य अध्यापकों के अधिकारों का उल्लघंन है।
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