बेसिक स्कूलों का मर्जर शुरू पर छात्र संख्या तय नहीं – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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 प्रदेश के कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का दूसरे स्कूलों में मर्जर (पेयरिंग) किया जा रह है लेकिन यह तय नहीं है कि छात्र संख्या कितनी हो। यह स्थानीय अधिकारियों पर छोड़ दिया गया है कि वे कितनी छात्र संख्या पर स्कूलों का मर्जर करेंगे। यही वजह है कि कहीं 10 तो कहीं 20 और किसी जिले में 50 से कम छात्र संख्या को आधार मानकर मर्जर के आदेश दिए जा रहे हैं।

जिलों में अलग-अलग मानक हाल

ही में प्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी किया है कि स्कूलों में और बेहतर माहौल बनाने के लिए कम छात्र संख्या वाले स्कूलों की दूसरे स्कूल में पेयरिंग की जाएगी। इस तरह एक स्कूल का दूसरे स्कूल में विलय किया जाएगा। प्रक्रिया पहले से चल रही थी। सूचनाएं मांगी जा रही थीं। शासन से आदेश होते ही स्कूलों का मर्जर शुरू भी हो गया है लेकिन यह तय नहीं है कि कितनी छात्र संख्या कम होने पर यह कार्यवाही की जाएगी। यही वजह है कि सभी बीएसए अपने स्तर से संख्या तय कर स्कूलों का मर्जर कर रहे हैं। मथुरा के बीएसए ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों से जो प्रस्ताव मांगा है, उसमें उन्होंने 20 से कम छात्र संख्या वाले स्कूल का दूसरे स्कूल में विलय करने  के आदेश दिए हैं। इसी तरह उन्नाव के बीएसए ने 10 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के विलय के आदेश दिए लेकिन उसी जिले में बीघापुर ब्लॉक में विलय होने वाले स्कूलों की लिस्ट जारी की गई तो उसमें 50 से कम छात्र संख्या को आधार बनाया गया। कासगंज और बदायूं में 50 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के एकीकरण के आदेश दिए गए हैं।

असहमति भी सामने आ रही : कई

जिलों में स्कूल प्रबंधन समिति और ग्राम पंचायतों की बैठक कर मर्जर पर असहमति भी जताई गई है। गाजियाबाद के प्राथमिक विद्यालय उजैड़ा दो में विद्यालय प्रबंधन समिति ने बैठक कर असहमति जताई है और बीईओ को पत्र लिखा है। लखनऊ के चिनहट ब्लॉक में पल्हरी ग्राम पंचायत की बैठक हुई। इसमें स्कूलों की पेयरिंग का विरोध किया गया है। गोरखपुर सहित कुछ और जिलों में भी ग्रामीणों ने असहमति जताई है। इस बारे में प्राथमिक शिक्षक संघ लखनऊ के उपाध्यक्ष निर्भय सिंह का कहना है कि विलय का कोई कारण या सकारात्मक सोच समझ नहीं आ रही। कोई आधार या कोई मानक तो होना चाहिए। वहीं, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का कहना है कि विलय होना ही गलत है।

पेयरिंग के लिए कोई बाध्यता नहीं है। सहमत है। यही जहां अभिभा जाएगी। डीएम और बीएसए जिले को बेहतर समझते हैं। शासनादेश में कोई संख्या या टारगेट नहीं तय किया गया है। कंचन वर्मा,महानिदेशक-स्कूल शिक्षा

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