प्रयागराज। एसटीएफ के नाम पर संवेदनशील दस्तावेज मंगवाने वाले गिरोह के बारे में एक और खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में सामने आया था कि फर्जी नोटिस सिर्फ कौशाम्बी के डीआईओएस को भेजे गए थे।
अब पता चला है कि गिरोह ने प्रयागराज, फतेहपुर, चित्रकूट और प्रतापगढ़ के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भी एसटीएफ अधिकारियों के नाम से फर्जी नोटिस भेजकर शिक्षकों की सूचनाएं मांगी थीं। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक इतना ही नहीं, जौनपुर के वीर
बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय को भी फर्जी पत्र भेजकर परीक्षा नियंत्रक से अनुशंसा पत्र तैयार करवाने का प्रयास किया
गया। दस्तावेज पर फर्जी हस्ताक्षर और मोहरें लगी थीं।
गिरफ्तार आरोपियों ने एसटीएफ लखनऊ के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा और एक अन्य अधिकारी सत्यसेन यादव के नाम का भी इस्तेमाल कर फर्जी नोटिस तैयार किए।
ये नोटिस ईमेल आईडी rkmishraupstf@gmail. com और rajku-marmishra8494@gmai 1.com से भेजे गए थे। इनमें शिक्षकों की बहाली से जुड़े दस्तावेज, अनुभव पत्र, नियुक्ति विवरण जैसे गोपनीय कागजात मांगे गए थे।
तीन आरोपी, दो गिरफ्तार
इस मामले में एसटीएफ ने दो
अभियुक्तों बजरंगीलाल गुप्ता
और जय किशन तिवारी को
गिरफ्तार कर लिया है। तीसरे
आरोपी ओमप्रकाश की
तलाश अभी जारी है।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कई शिक्षकों से बहाली दिलाने के नाम पर अवैध धन वसूला और फर्जी दस्तावेज बनाकर विभागीय अधिकारियों को गुमराह किया।
डिजिटल सबूत भी जब्त
पूरे मामले में फर्जी नोटिस, मोबाइल चैट्स, फर्जी ई-मेल, मोहरें, टैब और मोबाइल जब्त किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी दस्तावेज व्हाट्सएप और ई-मेल के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को भेजे गए थे। एसटीएफ अब इस पूरे गिरोह की डिजिटल फॉरेंसिक जांच के जरिये जड़ तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। संभावना जताई जा रही है कि यह नेटवर्क और भी जिलों में सक्रिय हो सकता है
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