विद्यालयों की दूरी बढ़ी तो बच्चों ने पढ़ाई से मुंह मोड़ा – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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पयागपुर (बहराइच)। परिषदीय विद्यालयों के विलय का प्रभाव पयागपुर क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है। यहां विद्यालयों के विलय के बाद शिक्षक तो निर्धारित विद्यालयों में पहुंच गए, लेकिन बच्चों ने पढ़ाई से मुंह मोड़ लिया। इन हालातों में अब शिक्षकों के साथ अभिभावकों ने विलय का विरोध शुरू कर दिया है। उन्होंने सरकार के इस फैसले को गलत बताया है।

पयागपुर विकास क्षेत्र में बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित 10 विद्यालयों का विलय पास के ही विद्यालयों में किया गया है। इसके तहत प्राथमिक विद्यालय राजापुर कला का विलय प्राथमिक विद्यालय रवींद्रनगर में किया गया है, जिसकी दूरी 400 मीटर और दूसरे प्राथमिक विद्यालय बभनपुरवा का विलय प्राथमिक विद्यालय राजापुर डिहवा में किया गया है। जिसकी दूरी 1.5 किमी है। ऐसे में शिक्षक तो विलय वाले विद्यालयों में चले गए, लेकिन बच्चे वहां जाने को तैयार नहीं हैं।

ग्राम पंचायत राजापुर कलां के मजरा कविराज पुरवा, कोरिनपुरवा, उत्तरीपुरवा आदि के बच्चे बीते कई वर्षों से संचालित प्राथमिक विद्यालय बभनपुरवा में पढ़ने आते रहे हैं। जो अब आदेश के तहत वहां से डेढ़ किमी दूर प्राथमिक विद्यालय राजापुर डिहवा में भेजे गए हैं। यहां एकमात्र शिक्षक देवकीनंदन त्रिपाठी की तैनाती है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावी हो रही है।

यही हाल क्षेत्र के अन्य विद्यालयों के भी हैं, जिसके कारण बच्चों की शिक्षा पर

विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि विलय का आदेश तो लागू कर दिया गया, लेकिन व्यावहारिकता का ध्यान नहीं रखा गया है। ऐसे में बच्चों ने स्कूल से किनारा कर लिया है। अब तक इसका शिक्षक विरोध कर रहे थे अब अभिभावकों ने भी विलय के खिलाफ मुखर होना शुरू कर दिया है। उनकी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है।

सुरक्षा का सता रहा डर

शिव दयाल ने बताया कि बच्चों को पढ़ाना तो चाह रहे हैं, लेकिन छोटे बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे पर छोड़कर इतने दूर उन्हें भेजा जाय। मनोज कुमार ने बताया कि रास्ते खराब हैं, कच्ची सड़कों के किनारे लगी झाड़ियों के बीच से होकर बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। कहीं कुछ अनहोनी होती है तो फिर कौन जिम्मेदार होगा। वीरेंद्र कुमार हैं। उन्हें पैदल डेढ़ किमी दूर कैसे भेजें। छोटे बच्चों सरकार सरकार को भी सोचना चाहिए। कहते हैं कि कक्षा एक व दो के बच्चे छोटे को स्कूल भेजने की व्यवस्था के बारे में

शिव दयाल, मनोज कुमार व वीरेंद्र कुमार संवाद

विद्यालयों में बच्चों को भेजने के लिए प्रबंध समिति और अभिभावकों की बैठक कर प्रोत्साहित किया जाएगा। जिन विद्यालयों का आदेश के बावजूद विलय नहीं हो रहा है उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डाली मिश्रा, बीईओ, पयागपुर

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