जिलाध्यक्ष ने बताया कि बेसिक विद्यालयों में चोरी की घटनाएं लगातार हो रही हैं। विशेष प्रकोष्ठ थाने में बनना चाहिए जिससे विद्यालय में चोरी की घटनाएं न हो।
विद्यालय में चोरी होने पर शिक्षकों की कोई बात थाने पर गंभीरता से नहीं ली जाती है जिससे असुरक्षा का वातावरण बनता है। निर्माण या मरम्मत आदि का कार्य किसी अन्य निर्माण एजेंसी से करनी चाहिए। इसमें शिक्षकों को कदापि नहीं लगना चाहिए। शिक्षकों को पुरानी पेंशन देना चाहिए। अगर संगठनों की मांग पर विचार करते हुए समय से निराकरण कर दिया जाए, तो निश्चित रूप से शिक्षा व्यवस्था सुधर जाएगी। शिक्षकों का 10 साल से पदोन्नति न किया जाना शिक्षा जगत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं। शिक्षण के लिए बनने वाली हर व्यवस्था में शिक्षक संगठनों की भागीदारी निश्चित करनी चाहिए। शिक्षकों के सुझाव घरातलीय होते हैं। एसी कमरों में ऐसे अधिकारियों के साथ जिनको व्यवहारिक कोई अनुभव नहीं होती है उनके द्वारा बनाई गई नीति कभी भी व्यावहारिक नहीं हो सकती। इसीलिए अब तक जितनी भी बेसिक शिक्षा में प्रयोग किए गए हैं वह असफल सिद्ध हुए। जिलाध्यक्ष ने कहा कि निर्माण कार्य, भोजन, जलकल, विद्युत व्यवस्था छात्रों की उपस्थिति सहित पचासों कार्य जो शिक्षकों से कराए जा रहे हैं जब तक इनको इससे मुक्त नहीं किया जाएगा तब तक शिक्षण व्यवस्था में सुधार होना संभव नहीं है। अधिकारियों का निरीक्षण आर्थिक उत्पीड़न करने का नहीं बल्कि सुधारात्मक होना चाहिए। शिक्षण करना हमारा कर्म सिद्ध अधिकार है। इसे हमें मिलना ही चाहिए।
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