प्रदेश में एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी और 50 से ज्यादा बच्चों वाले परिषदीय विद्यालयों का विलय न करने के आदेश से पहले जिन ऐसे स्कूलों का विलय हो चुका था उन्हें निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका असर परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की चल रही तबादला व समायोजन प्रक्रिया पर भी पड़ेगा। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा परिषद ने ऑनलाइन आवेदन की तिथि एक से बढ़ाकर चार अगस्त कर दी है।
परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी की ओर से हाल ही में जारी आदेश में यह कहा गया था कि विलय वाले विद्यालयों के शिक्षक भी तबादले व समायोजन के लिए ऑनलाइन आवेदन करेंगे। पर, अब कुछ विद्यालयों का विलय वापस होने की संभावना है तो इन स्कूलों के शिक्षक सबसे ज्यादा ऊहापोह में हैं। अगर वे तबादले के लिए आवेदन कर दें और दूसरे विद्यालय में उनकी तैनाती हो जाए और बाद में उनका विद्यालय फिर से संचालित होने लगे तो यहां कौन पढ़ाएगा?
वहीं, अगर विद्यालय का विलय निरस्त हो गया तो क्या उन शिक्षकों का तबादला भी निरस्त होगा। विभाग के पास भी इन सवालों का कोई जवाब नहीं है। जिन विद्यालयों का विलय निरस्त होना है उसकी प्रक्रिया एक सप्ताह में पूरी होनी है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि विभाग अभी इसकी तिथि और आगे बढ़ाएगा या फिर कुछ और संशोधन किए जाएंगे।
स्कूल बंद करना पीडीए के खिलाफ बड़ी साजिश : अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता समझ गई है कि स्कूल बंद करना पीडीए समाज के खिलाफ भाजपा की एक बहुत बड़ी साजिश है। ताकि, पीडीए समाज के लोग पढ़ न पाएं। इन स्कूलों में बूथ न बन पाएं, जिससे पीडीए समाज वोट न डाल सके। भाजपा का यह राजनीतिक षडयंत्र हम कभी सफल नहीं होने देंगे। समाजवादी पार्टी का पीडीए पाठशाला का अभियान जारी रहेगा।
अखिलेश ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि भाजपा सरकार के एजेंडे में शिक्षा, नौकरी और रोजगार नहीं है। भाजपा की डबल इंजन की सरकार हर मोर्चे पर फेल है। विद्यार्थी और शिक्षक सड़क पर आंदोलन करने पर मजबूर हैं। भाजपा सरकार नौजवानों का वर्तमान और भविष्य दोनों बर्बाद करने की दोषी है।
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