नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के 105 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने के फैसले के खिलाफ आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। यूपी सरकार ने जिन प्राथमिक विद्यालयों में शून्य या कम नामांकन हैं उनका पास के दूसरे विद्यालय में विलय कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता
और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस बात पर गौर किया कि इसी तरह का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है। पीठ ने याचिकाकर्ता से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका को वापस लेने को कहा। याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि सैकड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। पीठ ने कहा कि यह एक स्थानीय समस्या है और अन्य राज्यों तक नहीं फैली है, इसलिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को इसकी जांच करनी चाहिए। अदालत ने कहा कि यह मामला बच्चों के निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत वैधानिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित है। हाईकोर्ट पहले से ही इस मामले पर विचार कर रहा है, इसलिए बेहतर होगा कि वह इस पर निर्णय ले। अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की छूट दी और मामले का शीघ्र निपटारा करने के लिए कहा।
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