नई दिल्ली: नौकरी में बने रहने के लिए टीईटी की अनिवार्यता को लेकर मामले में शिक्षक संघ ने लंबी लड़ाई के लिए कमर कस ली है। शिक्षकों को राहत दिलाने के लिए अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ सरकार पर नियम-कानून में राहत देने की मांग कर रहा है। जिन राज्यों में नियुक्ति हुई, वहीं टीईटी पास की नौकरी जारी रहनी चाहिए और नियुक्ति तिथि महत्वपूर्ण होनी चाहिए। प्राथमिक शिक्षक संघ ने पिछले सप्ताह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की थी। सरकार से यह मांग की गई कि नियुक्ति तिथि को अहमियत दी जाए, टीईटी अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, सरकार पर राहत देने का दबाव बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद प्राथमिक शिक्षक संघ ने देशभर के शिक्षकों की समस्या सरकार के समक्ष विचार-विमर्श के लिए रखी है।
एक से आठ तक के छात्रों को पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को नियुक्ति के लिए टीईटी पास करना होगा। इस तरह नामांकन रहने वालों को अनिवार्य सेवायोजन दी जाएगी। प्रवक्ता ने बताया कि टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले शिक्षकों को ही नियुक्ति दी जाएगी और नियुक्ति तिथि के आधार पर नौकरी नहीं दी जाएगी। कोर्ट का आदेश पर गौर देने के लिए ही यह परीक्षा ली गई है। पिछले शिक्षकों, जिन्हें 2011 से नियुक्ति मिली उनके शिक्षकों को नौकरी पर तलवार लटक गई है। शिक्षकों की नौकरी पर संकट बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने गत सितंबर की एक निर्णय में कहा है कि बिना टीईटी पास शिक्षकों को नौकरी जारी रखना संभव नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति तिथि के आधार पर नौकरी जारी नहीं की जा सकती। इस पर संघ के अध्यक्ष सुशील पांडेय, महासचिव कुमार सोहन बिल्लौर और राज्य के अध्यक्ष प्रमेश शुक्ल का कहना है कि सरकार को शिक्षकों के हित में टीईटी की अनिवार्यता खत्म कर नियुक्ति तिथि के अनुसार राहत देने पर विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर संघ के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी विचार-विमर्श कर रहे हैं और शीघ्र ही समस्त प्रदेशों में सघन अभियान शुरू किया जाएगा। अनिवार्यता खत्म करने हेतु संगठित रूप से उचित और जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
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