सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टेट) पास करना अनिवार्य किए जाने के आदेश से शिक्षक वर्ग में गहरी बेचैनी फैल गई है। इसी मानसिक दबाव का शिकार मिर्जापुर जिले के छानबे क्षेत्र के कम्पोजिट विद्यालय मनिकठी में कार्यरत 52 वर्षीय सहायक अध्यापक हिमांशु सिंह हुए।
दिनांक 6 सितंबर को विद्यालय से घर लौटने के बाद हिमांशु सिंह को अचानक हार्ट अटैक आया। उन्हें गंभीर हालत में प्रयागराज के झूंसी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे आईसीयू में उपचाराधीन हैं। जमुनीपुर कोटवा (प्रयागराज) निवासी हिमांशु सिंह 29 सितंबर 2011 से परिषदीय विद्यालय में सेवा दे रहे हैं।
उनके बेटे अंकित सिंह ने बताया कि आरटीई एक्ट से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टेट परीक्षा देने का आदेश आने के बाद से पिता लगातार गहरी चिंता में थे। उन्हें आशंका थी कि अगर परीक्षा पास नहीं कर पाए तो नौकरी खतरे में पड़ सकती है। इसी मानसिक दबाव के बीच उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
इस घटना के बाद शिक्षकों में असुरक्षा की भावना और गहराई है। उत्तर प्रदेश जूनियर शिक्षक संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष अमरेश कुमार शुक्ला और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के ब्लॉक अध्यक्ष गणेश ओझा ने शिक्षकों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि टेट परीक्षा की अनिवार्यता को चुनौती देने और शिक्षकों के अधिकार सुरक्षित करने के लिए सामूहिक लड़ाई लड़ी जाएगी। इसके लिए संगठन स्तर पर रणनीति तैयार की जा रही है।
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