सावधान!, कहीं आप भी तो नकली दवाएं नहीं खा रहे!, कंपनियों की रिपोर्ट में हृदय, एलर्जी व डायबिटीज की दवाएं नकली निकलीं – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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आगरा। दवाएं खरीदने जा रहे हैं तो सावधान हो जाइए। बाजार में हृदय, एलर्जी और डायबिटीज समेत कई रोगों की नकली दवाएं बड़ी मात्रा में मौजूद हैं। नक्कालों ने एंटीबायोटिक व जीवन रक्षक दवाओं को भी नहीं छोड़ा है।

विभिन्न प्रदेशों में हाल में पकड़ी गईं करोड़ों की दवाओं की रिपोर्ट सरकारी प्रयोगशालाओं ने भले ही जारी नहीं की हों, मगर कई नामी-गिरामी कंपनियों ने नकली दवाएं बाजार में खपाने की आधिकारिक पुष्टि परीक्षण के बाद की है। जाइडस, ग्लेनमार्क, सन फार्मा और सेनोफी जैसी नामी कंपनियों ने अपने ब्रांड की नकली दवाएं होने की शिकायत की थी, जिसके आधार औषधि विभाग ने आगरा, लखनऊ के साथ मुजफ्फरनगर में बड़ी कार्रवाई की। इसमें खुलासा हुआ कि चेन्नई की बंद पड़ी फार्मा कंपनियों में तैयार करीब 200 करोड़ की नकली दवाएं बाजार में खपाई गई हैं। आगरा की विभिन्न फर्मों के नाम से कटे बिलों के साथ ही 75 करोड़ की दवाएं सील की गईं। सील दवाओं के नमूने जांच के लिए सरकारी प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं, मगर फार्मा कंपनियों ने जांच में कई दवाओं को नकली, तो कुछ को संदिग्ध बताया।

संदिग्ध दवाएं

ब्रिलेंटा 90 एमजी:- ह्रदय रोग में काम आती है।

ड्रोटिन डीएस:- किडनी और पेट दर्द में देते हैं।

यूनिस्पास:- मांसपेशियों की ऐंठन-दर्द के लिए।

मेडले टैबलेट:- बैक्टीरिया के संक्रमण के लिए।

क्लोप पी क्रीम:- सूजन और खुजली के लिए।

काम्पलेमिना:- दिमाग में रक्त प्रवाह बढ़ाने के लिए।

फेरोनेम ईआर:- मूत्र, सांस पथ के इलाज में।

डेरोबिन टैबलेट:- सोरायसिस के इलाज के लिए।

एलेग्रा-120 टैबलेट:- एलर्जी से राहत-प्रबंधन के लिए।

एलेग्रा-एम टैबलेट:- बहती, नाक, छींक, खांसी के लिए।

ओसिड कैप्सूल:- एसिड, अल्सर, छाती दर्द के लिए।

बिल जरूर लें

जब भी दवाएं खरीदें तो असली बिल जरूर मांगें। कम्प्यूटराइज्ड बिल पर दवा का बैच नंबर, कंपनी का नाम, तिथियों के अलावा क्यूआर कोड रहता है। दवा नकली होने की दशा में विक्रेता के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा किया जा सकता है।

ऐसे बरतें सावधानी

● जेनरिक दवा ही लेंं। अधिकतर महंगी ब्रांडेड दवाइयों की ही नकल होती है।

● यह भ्रम निकाल दें कि जेनरिक दवाइयां असर नहीं करतीं

● ब्रांडेड जेनरिक दवाएं ही खरीदें, बड़ी कंपनी अपने नाम से समझौता नहीं करती।

एलेग्रा 120:- बंद नाक, छींक, खुजली एलर्जी में।

वर्टिन 8 एमजी:- चक्कर, असंतुलन, मनोविकार।

वर्टिन 16 एमजी:- चक्कर, असंतुलन, मनोविकार।

रोसुवास 10 एमजी:- कोलेस्ट्रोल रोकने के लिए।

रोसुवास-20 एमजी:- ह्रदय रोग में काम आती है।

रोसुवास-40 एमजी:- ह्रदय रोग में काम आती है।

आगरा में करोड़ों की दवाइयां सीज की गई हैं। अब इनके बिलों का विश्लेषण चल रहा है। जैसे-जैसे प्रदेश के दूसरे हिस्सों में कनेक्शन निकल रहा है, लखनऊ को खबर की जा रही है। छापेमारियां भी जारी हैं। – अतुल उपाध्याय, सहायक औषधि आयुक्त आगरा मंडल।

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