गलत वेतन निर्धारण करा सात शिक्षकों ने लगाया 70 लाख का चूना
रामपुर, बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अनियमित वेतन भुगतान का मामला सामने आया है। रामपुर में सात शिक्षकों ने लेखा कार्यालय में साठगांठ कर गलत वेतन निर्धारण कराया। करीब आठ साल से चल रहे इस फर्जीवाड़े में विभाग को करीब 70 लाख का चूना लगाया। वित्त एवं लेखा अधिकारी की आख्या पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अगस्त से शिक्षकों का वेतन दुरुस्त किया। अब इनसे वसूली की जानी है, जो प्रति शिक्षक 10 लाख रुपये के करीब है।
एक जनवरी 2006 से एक दिसंबर 2008 के बीच भर्ती शिक्षकों को पदोन्नति पर 17,140 रुपये का वेतनमान मिलने का शासनादेश नौ जून 2014 को आया था। रामपुर में मई 2018 में सात शिक्षकों ने लेखा कार्यालय से संपर्क स्थापित कर अपने मूल वेतन (13,500) को भी प्रति माह 3,640 रुपये बढ़वाकर 17,140 करवा लिया। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री आनंद प्रकाश गुप्ता ने इसकी शिकायत शासन में की। शासन की आडिट टीम ने जुलाई 2021 में निरीक्षण कराया। जिसमें अजहर अहमद, कविता धीर अरोड़ा, वाणी सिन्हा, नीरू अग्रवाल, मोनिका रस्तोगी, नीतू व श्रीति सक्सेना (सात शिक्षकों) का
भुगतान नियम विरुद्ध मिला। वित्त नियंत्रक (बेसिक) ने आडिट रिपोर्ट महानिदेशक को भेजी। अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने इस बारे में रामपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी और वित्त एवं लेखा अधिकारी को आठ अगस्त को तलब किया। वित्त एवं लेखा अधिकारी विकास खंडेलवाल ने सातों शिक्षकों को हुए अधिक भुगतान और वर्तमान सही मूल वेतन की जानकारी दी।
वित्त एवं लेखा अधिकारी की आख्या पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अगस्त से इनका वेतन दुरुस्त कराया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कल्पना देवी ने बताया कि वेतन निर्धारण गलत होने की जानकारी लेखाधिकारी से मिलने के बाद सातों शिक्षकों का वेतन संशोधित कर दिया गया है। अब इन शिक्षकों को नोटिस देकर पहले उनका पक्ष लिया जाएगा। इसके साथ ही लिए गए ज्यादा वेतन की कटौती व अन्य कार्रवाई होगी।
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