बलरामपुर, । विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन नॉर्मल स्कूल कैंपस में आयोजित की गई। बैठक में प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर सर्वोच्च न्यायालय के शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्यता के आदेश को लेकर शिक्षा मंत्री सचिव स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता नई दिल्ली को पत्र भेज कर आदेश पुनर्विचार करने की मांग की है।
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प्रांतीय कोषाध्यक्ष दिलीप चौहान ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आए दिन परिषदीय अध्यापकों पर कोई न कोई आदेश उन्हें आर्थिक, शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान कर रहा है। जबकि शिक्षक पूरे मनोयोग से बुनियादी शिक्षा का कार्य कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश के दो लाख एवं देश के लगभग 20 लाख से अधिक शिक्षक सर्वोच्च न्यायालय के शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्यता के आदेश से प्रभावित हैं। इस आदेश को करने के पहले न्यायालय ने शिक्षक एवं योग्यता की पहलुओं पर तमाम कमियां छुट्टी हुई है जिनका पुनर्विचार किया जाना शिक्षक एवं परिजनों के हित में नितांत आवश्यक है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से शिक्षक एवं उनके परिजनों में नौकरी जाने का डर एवं भय समाया हुआ है। जिला अध्यक्ष ने कहा दी एनसीईसी के गाइडलाइन 23 अगस्त 2010 के पूर्व शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है यह स्पष्ट है। महामंत्री तुलाराम गिरी ने कहा कि शिक्षकों के सामने एक मात्र विकल्प आंदोलन का ही बचा है। सभी शिक्षकों ने एकजुट होकर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर पुनर्विचार को लेकर प्रधानमंत्री केंद्रीय शिक्षा मंत्री, सचिव स्कूल साक्षरता नई दिल्ली को पत्र भेज कर तत्काल शिक्षकों के हित में कदम उठाने की मांग की है।
इस अवसर पर जिला मीडिया प्रभारी निर्मल द्विवेदी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ उत्तम चंद्र गुप्ता, विनोद चौहान, डॉ उत्तमचंद, धर्मेंद्र कुमार गुप्ता, शिवाकांत, राघवेंद्र प्रताप मिश्र, प्रदीप चौहान, करम हुसैन, अमिताभ सिंह व शिव कुमार मिश्रा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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