शिक्षा के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा
याचिका में कहा गया है कि अल्पसंख्यक प्रबंधित संस्थानों को शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून के दायरे से बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 21 और 21ए में दिए गए समानता और शिक्षा के मौलिक अधिकारों का हनन है।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित काजलिस्ट के मुताबिक मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और एजी मसीह की पीठ करेगी। याचिका में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (आरटीई अधिनियम) की धारा 1(4) और 1(5) को चुनौती दी गई और उन्हें ”मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक” बताया गया।
जनहित याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 21ए के तहत मिला शिक्षा के अधिकार से मतलब समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से है। इसलिए, कुछ स्कूलों को टीईटी से बाहर रखना संविधान के लक्ष्यों के खिलाफ है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई कर रहे याचिकाकर्ता नितिन उपाध्याय ने कहा कि अनुच्छेद 30, जो अल्पसंख्यकों को शैक्षिक संस्थानों को स्थापित और प्रशासन के आधिकार की रक्षा करता है, उसकी व्याख्या उद्देश्यपरक होनी चाहिए, न कि शाब्दिक।
सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की याचिका पर उठाए सवाल, पूछा- मकसद क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने भारत में वैकल्पिक निवेश फंडों (एआइएफ) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) के अंतिम लाभार्थी मालिकों का सार्वजनिक राजफाश करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित काजलिस्ट के मुताबिक मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और एजी मसीह की पीठ करेगी। याचिका में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (आरटीई अधिनियम) की धारा 1(4) और 1(5) को चुनौती दी गई और उन्हें ”मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक” बताया गया।
जनहित याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 21ए के तहत मिला शिक्षा के अधिकार से मतलब समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से है। इसलिए, कुछ स्कूलों को टीईटी से बाहर रखना संविधान के लक्ष्यों के खिलाफ है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई कर रहे याचिकाकर्ता नितिन उपाध्याय ने कहा कि अनुच्छेद 30, जो अल्पसंख्यकों को शैक्षिक संस्थानों को स्थापित और प्रशासन के आधिकार की रक्षा करता है, उसकी व्याख्या उद्देश्यपरक होनी चाहिए, न कि शाब्दिक।
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सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने भारत में वैकल्पिक निवेश फंडों (एआइएफ) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) के अंतिम लाभार्थी मालिकों का सार्वजनिक राजफाश करने की मांग की थी।
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