मथुरा। विधानसभा मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में इस बार शिक्षकों की जिम्मेदारी तय होते ही कई शिक्षक अचानक बीमार पड़ने लगे हैं। बीएलओ ड्यूटी से बचने के लिए शिक्षक अब मेडिकल मास्टर बन गए हैं। तहसीलदारों के पास रोजाना 5 से 6 मेडिकल आ रहे हैं। लगातार आ रहे इन मेडिकलों को देखकर प्रशासन ने भी सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
एसआईआर (स्पेशल इंवेस्टिगेशन रिवीजन) घोषित होने के बाद से प्रशासन ने सख्ती दिखाते बीएलओ ड्यूटी में शामिल (शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, इंजीनियरों) कर्मचारियों को सख्ती से ड्यूटी करने के आदेश दिए गए हैं। मगर इसके बावजूद भी कई विद्यालयों से एक के बाद एक शिक्षक बीमार होने का हवाला देकर मेडिकल जमा करा रहे हैं। बीमारियों के नाम पर किसी को पीठ दर्द है, तो किसी को वायरल या ब्लड प्रेशर की शिकायत तो किसी की मां या पिता की बीमारी का मामला सामने आ रहा है।
जबकि कुछ शिक्षकों ने तो महीने भर का लंबा मेडिकल लगाकर ड्यूटी से छुटकारा पा लिया है। इस सामूहिक बीमारी ने अफसरों के माथे पर बल डाल दिया है। हालांकि एडीएम (एफआर) पंकज कुमार वर्मा का कहना है कि एसआईआर का काम अति महत्वपूर्ण है। बीमारियों का नाटक नहीं चलने वाला है।
डीएम ने किया मेडिकल बोर्ड का गठन
बीमारी के मेडिकल प्राइवेट अस्पतालों के हैं। इनकी जांच के लिए डीएम ने मेडिकल बोर्ड के गठन कर दिया है। इस डर से शिक्षक सरकारी अस्पतालों के मेडिकल नहीं लगा रहे हैं।
रोजाना 4 से 6 मामले आ रहे हैं। बीएलओ ड्यूटी नहीं करने वाले चार के खिलाफ वेतन रोकने की कार्रवाई की जा चुकी है।
जितेंद्र सिंह, तहसीलदार सदर
बीएलओ में ड्यूटी नहीं करने वाली आठ शिक्षकों को संस्पेंड किया जा चुका है। इस प्रक्रिया को आगे भी जारी रखा जा रहा है।
रतन कीर्ति, बीएसए
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