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छुट्टी, वेतनमान सब ऑनलाइन, फिर भी शिक्षा विभाग के काम पेंडिंग

केस-1

बाराबंकी के हरख ब्लॉक में शिक्षकों की छुट्टियों के 84 आवेदन पेंडिंग है। उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया, लेकिन बीईओ कार्यालय से अप्रूव नही हुए है। पूरे जिले में सभी 15 ब्लॉक और नगर क्षेत्र मिलाकर 804 आवेदन पेंडिंग है।

केस-2

करीब छह महीने पहले शिक्षकों को फंडामेंटल लिट्रेसी ऐड न्युमिरेसी का प्रशिक्षण दिया गया था। इस प्रशिक्षण के लिए उनको 750 रुपये भत्ता दिया जाना था। यह भत्ता भी ऑनलाइन उनके खाते में आना था, लेकिन अब तक नही आया।

ये दो उदाहरण शिक्षा विभाग में ऑनलाइन कामों की रफ्तार का आइना हैं। इसके अलावा भी कई काम ऐसे हैं जो ऑनलाइन होते हैं और पेंडेंसी खत्म होने के साथ ही काम की रफ्तार बढ़ने के दावे किए जाते हैं। हकीकत ये है कि सामान्य भत्तों से लेकर एनओसी और छुट्टियों का अप्रूवल तक लंबे समय तक फंसा रहता है। व्यवस्था ऑनलाइन होने के बावजूद शिक्षकों को विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में रिश्वत की मांग तक के आरोप लगते हैं।

छुट्टियां लटकाने पर चेतावनीः छुट्टियों के अप्रूवल की ही बात करें तो सीसीएल, अर्जित अवकाश, आकस्मिक अवकाश, चिकित्सीय अवकास सहित सभी तरह की छुट्टियां ऑनलाइन ही अप्रूव की जाती है। बाराबंकी का मामला तो इसलिए सामने आ गया कि वहां के बीएसए ने खुद सभी बीएसए को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने लिखा है कि काफी अधिक मात्रा में छुट्टियों के आवेदन लंबित हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि है कि तत्काल इनको अग्रसारित करें, अन्यथा की स्थिति में समस्त जिम्मेदारी आपकी होगी। शिक्षकों का आरोप है कि हर जिले में यही हाल है।

चयन वेतनमान लंबितः चयन वेतनमान भी ऑनलाइन लगना होता है, लेकिन नवंबर से अब तक ज्यादातर जिलों में अभी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। शिक्षक चयन वेतनमान के इंतजार में हैं। इसको लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, यूनाइटेड टीचर्स असोसिएशन

सहित कई शिक्षक संगठनों ने अधिकारियों से शिकायत की। डीजी से लेकर कई जिलों के बीएसए तक ने इस पर पत्र लिखकर चयन वेतनमान की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश भी दिए, लेकिन उसके बावजूद ब्लॉक स्तर के अधिकारी इसको लटकाए हुए हैं। शिक्षकों की शिकायत है कि इसके लिए भी शिक्षकों से तीन हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक की मांग की जाती है।

‘जिम्मेदारी तय हो’

शिक्षकों का आरोप है कि विभाग ने ऑनलाइन व्यवस्था तो कर दी, लेकिन अफसरों और कर्मचारियों के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया, ऑफलाइन जितने ही लंबे समय तक काम लटके रहते है। प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद शिक्षको को कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते है कि अफसरों का रवैया नहीं बदलेगा, तब तक ऑनलाइन व्यवस्था का कोई फायदा नहीं। उच्च अधिकारियों को पेडिंग कामों की लगातार समीक्षा करनी चाहिए और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।

ये काम ऑनलाइन

जीपीएफ से अडवास भुगतान, सभी प्रकार

की एनओसी, चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान, नया वेतन भुगतान, नोटिस का स्पष्टीकरण, मानव संपदा पोर्टल पर सशेधन, वेतन वैरिएशन पर संशोधन, अन्य संशोधन ऑनलाइन किए जाने की व्यवस्था विभाग ने की है।

जो भी ऑनलाइन काम होने हैं, वे बिना विलंब के तुरंत होने चाहिए। इस बारे में लगातार निर्देश दिए जा रहे है। इसकी समीक्षा भी की जाती है। चयन वेतनमान शिक्षकों को समय पर मिले, इसकी लगातार समीक्षा करके निर्देश भी दिए जा रहे हैं। – मोनिका रानी, डीजी-स्कूल शिक्षा

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