फतेहपुर, । बच्चों में पढ़ने के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए परिषदीय विद्यालयों में पुस्तकालय विकसित किए जाएंगे। वहां बच्चों की मनपसंद किताबें रखी जाएंगी। रोचक और ज्ञानवर्धक पुस्तकों के जरिए उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षक बच्चों से पुस्तकों के शीर्षक और उनके पात्रों पर चर्चा करेंगे।पुस्तकालय में बच्चों के लिए बरखा सीरीज की पुस्तकें, पंचतंत्र की कहानियां, बाल साहित्य, शब्द संग्रह के साथ ही प्रसिद्ध साहित्यकार प्रेमचंद के कहानी संग्रह जैसी पुस्तकें रखी जाएंगी। इससे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ साहित्य और कहानियों से भी जुड़ने का अवसर मिलेगा। स्कूलों में पुस्तक पढ़ने की गतिविधि को रोचक बनाने के लिए शिक्षक पढ़ी हुईं किताबों पर बच्चों से चर्चा करेंगे।
इस दौरान बच्चों से किताबों के शीर्षक, पात्रों और उनकी थीम के बारे में सवाल पूछे जाएंगे, जिससे उनकी समझ और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित हो सके। वहीं, शिक्षक भी पुस्तक मेलों से ज्ञानवर्धक पुस्तकें खरीदकर विद्यालय के पुस्तकालय में रखेंगे, ताकि बच्चों को विविध विषयों की किताबें पढ़ने को मिल सकें। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस पहल से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित होगी और उनकी कल्पनाशक्ति और भाषा कौशल मजबूत होगा।इनसेटसप्ताह में एक दिन विभागीय अधिकारी करेंगे निरीक्षणसप्ताह में एक दिन विभागीय अधिकारी विद्यालयों में जाकर पुस्तकालय का निरीक्षण करेंगे। पुस्तकालय की गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल करेंगे। प्रत्येक स्कूल में बच्चों से पढ़ी गई पुस्तकों के बारे में बातचीत कर उनकी जानकारी और रुचि का आंकलन करेंगे।इनसेटअकबर-बीरबल की कहानियां भी पढ़ेंगे बच्चेबच्चों में भाषा और नैतिकता के विकास के लिए पुस्तकें की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसे ध्यान में रखकर शासन की तरफ से बाल वाटिका से लेकर आठवीं तक प्रत्येक कक्षा कक्ष में लर्निंग कार्नर विकसित किया जा रहा है। छोटे बच्चों के लिए चित्र और कहानी की पुस्तकें, नैतिक शिक्षा और मनोरंजन के लिए अकबर, बीरबल की कहानियां, अमर चित्रकथा, तोता चांद, जयशंकर प्रसाद की रचित आंसू, पंडित श्याम नारायण पांडेय की हल्दी घाटी, सुदामा चरित आदि पुस्तकें विद्यालयों में उपलब्ध कराई जा रही हैं।कोट……..बच्चों में किताबों के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए सभी विद्यालयों में पुस्तकालय विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए शासन की तरफ से निर्देश आया है। जो भी पुस्तकें शासन से प्राप्त होंगी उन्हें विद्यालयों में भेजा जा रहा है।-भारती त्रिपाठी, बीएसए
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