पशु चारा और पानी के नमूने जांच को भेजे
बाहरी मिलावट या संदूषण की आशंका की पड़ताल के लिए पशुपालन विभाग की टीमों ने दूध, पशुचारे और पानी के अतिरिक्त नमूने एकत्र किए हैं, जिन्हें विषविज्ञान संबंधी जांच के लिए भेजा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं किसी बाहरी तत्व ने इस त्रासदी को जन्म तो नहीं दिया।
राजमहेन्द्रवरम, एजेंसी। आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में दूध में मिलावट मामले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है, जबकि तीन लोगों का अस्पताल में उपचार चल रहा है।
राज्य सरकार ने रविवार को बयान जारी कर बताया कि प्रयोगशाला जांच के नतीजों से पता चला है कि 16 पीड़ितों की मौत ‘एथिलीन ग्लाइकॉल’ नामक जहरीले पदार्थ से दूषित दूध पीने के बाद हुई। इस दूध के कारण उनकी किडनी ने अचानक काम करना बंद कर दिया (एक्यूट रीनल फेलियर), जिससे उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया। यह मामला पहली बार 22 फरवरी को तब सामने आया, जब किडनी फेल होने के गंभीर लक्षणों वाले कई मरीजों की रिपोर्ट मिली थी। प्रारंभिक जांच में पता चला कि दूध का सेवन ही विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने का मुख्य स्रोत था। ऐसा बताया जा रहा है कि कोरुकोंडा मंडल के नरसपुरम गांव में स्थित वरलक्ष्मी मिल्क डेरी 106 परिवारों को दूध की आपूर्ति करती है। आपूर्ति को तुरंत रोक दिया गया है।
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