उत्तर प्रदेश में 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय भवन के निर्माण को नक्शा पास कराने से छूट मिली हुई है लेकिन इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण जरूरी है। गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आनंद वर्धन ने सोमवार को इस बारे में एक महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनसामान्य में यह धारणा बनी हुई है कि 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक निर्माण के लिए किसी प्रकार की कार्रवाई की जरूरत नहीं होती है। जबकि यह धारणा भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2025 के अनुरूप नहीं है।
आनंद वर्धन ने बताया कि भवन निर्माण उपविधियों के अनुसार 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय उपयोग के लिए नक्शा स्वीकृति से भले ही छूट दी गई है लेकिन निर्माणकर्ता के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तैयार पोर्टल map.up.gov.in पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित व्यक्तियों को निर्देशित किया जाता है कि वे अपने निर्माण कार्य का पंजीकरण उक्त पोर्टल पर करें। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि आवेदन शुल्क केवल 1 (एक) रुपये है। इसके अतिरिक्त अन्य सभी शुल्क पोर्टल पर दर्शाए गए अनुसार ही जमा करने होंगे। यह भी बताया जाता है कि शुल्क या प्रक्रिया में किसी प्रकार का परिवर्तन करने में गोरखपुर विकास प्राधिकरण की कोई भूमिका नहीं है।
बायलाज के मानक के अनुसार करना होगा निर्माण
बता दें कि नए बिल्डिंग बायलाज में 100 वर्ग मीटर के भूखंड पर बनने वाले मकान और 30 वर्ग मीटर में बनने वाली दुकान को सबसे कम जोखिम में रखा गया है। इनके निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत कराने की जरूरत नहीं होगी लेकिन इनके निर्माण में भवन उपविधि के सभी प्रावधानों का पालन करना होगा। निर्माणकर्ता को स्वप्रमाणित भी करना होगा कि उनका मकान बिल्डिंग बायलाज के मानक के अनुसार ही बन रहा है।
निर्माणकर्ता को एक रुपए की टोकन मनी जमाकर आनलाइन पंजीकरण कराना होगा। भूमि के स्वामित्व, भूखंड के आकार और कितने मंजिल का मकान होगा, इसे स्वयं प्रमाणित करना होगा। घोषणा पत्र भी देना होगा।
योगी कैबिनेट ने पिछले साल दी थी मंजूरी
सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में जुलाई 2025 में हुई यूपी कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधियों तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशन्स 2025 को मंजूरी दी गई थी। उत्तर प्रदेश के शहरों में अब मकान के साथ दुकान बनाने की सुविधा भी मिलेगी। मिश्रित उपयोग का यह छूट वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 24 मीटर या अधिक चौड़ी सड़कों पर होगी। 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों में 18 मीटर या अधिक चौड़ी सड़कों पर यह छूट होगी।
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