प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त गैर सरकारी स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 910 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा के परिणाम को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को जायज ठहराया है। कहा कि चयन प्रक्रिया की शुचिता और निष्पक्षता सबसे पहले है। यदि जांच में पेपर लीक और अनियमितता के साक्ष्य मिलते हैं तो पूरी परीक्षा निरस्त करना कानूनी रूप से सही है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने पेपर लीक के आधार पर परीक्षा रद्द करने के खिलाफ याचिका दाखिल लक्ष्मी और 10 अन्य की ओर से दायर याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया। यह मामला विज्ञापन संख्या 51 के तहत वर्ष 2022 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। लिखित परीक्षा अप्रैल 2025 में संपन्न हुई थी। परीक्षा के तुरंत बाद लखनऊ में दो प्राथमिकियां दर्ज कराई गईं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि कुछ आरोपी अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध करा रहे थे।
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