यूपी के लाखों सरकारी टीचर्स की नौकरी पर ‘संकट’:TET परीक्षा दें या फिर SIR और जनगणना के टारगेट पूरे करें – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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📰 यूपी में TET अनिवार्यता का बड़ा असर: 1.86 लाख शिक्षक दबाव में, UPTET 2026 बना निर्णायक मौका

लखनऊ:
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था इस समय एक बड़े बदलाव और विवाद के दौर से गुजर रही है। प्रदेश में करीब 1.86 लाख कार्यरत शिक्षक अभी तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं कर पाए हैं। इनमें प्राथमिक (कक्षा 1–5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6–8) स्तर के शिक्षक शामिल हैं।

इनमें से लगभग 50 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जो न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी न होने के कारण TET परीक्षा में बैठने के भी पात्र नहीं हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है.

👇 पढ़िए विस्तार से पूरी न्यूज़

यूपी में 1.86 लाख शिक्षक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं हैं। ये शिक्षक प्राथमिक (कक्षा 1 से 5 तक) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8 तक) विद्यालयों के हैं। इनमें 50 हजार तो ऐसे हैं, जो न्यूनतम योग्यता न होने के कारण परीक्षा में बैठ भी नहीं सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने TET पास करने के लिए सितंबर, 2027 की समय सीमा तय कर रखी है।

ऐसे में यूपी में चार साल बाद जुलाई में होने वाली UPTET-2026 शिक्षकों के लिए एक बड़ा मौका है। मुश्किल ये है कि SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की गुत्थी में उलझे इन शिक्षकों को समझ नहीं आ रहा है कि मई में होने वाले राष्ट्रीय जनगणना की ड्यूटी के बीच वे परीक्षा की तैयारी कब करेंगे?

परीक्षा का शेड्यूल क्या है, शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना क्यों जरूरी है? सेवा चयन आयोग ने यूपी टीईटी में शिक्षकों के लिए क्या शर्तें जोड़ी हैं? शिक्षक संघ क्यों 2011 से पहले कार्यरत शिक्षकों के लिए अनिवार्य किए जा चुके टीईटी का विरोध कर रहे हैं? पढ़िए ये रिपोर्ट…

4 साल बाद हो रही यूपीटीईटी उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 20 मार्च को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा का कार्यक्रम घोषित किया। यूपी में ये परीक्षा 4 साल बाद होने जा रही है। इससे पहले 2021 में परीक्षा के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन परीक्षा 2022 में हो पाई थी।

इस बार परीक्षा में 15 से 20 लाख आवेदक शामिल हो सकते हैं। इसमें 1.86 लाख वे शिक्षक भी शामिल हैं, जो परिषदीय विद्यालयों में बिना टीईटी पास कार्यरत हैं।

वन टाइम रजिस्ट्रेशन अनिवार्य शिक्षा सेवा चयन आयोग ने यूपीटीईटी के आवेदन में वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) अनिवार्य कर दिया है। सभी नए आवेदकों को पहले वन टाइम रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद ही वे परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन कर पाएंगे। पूर्व में वन टाइम रजिस्ट्रेशन करा चुके आवेदकों को सिर्फ अपनी लॉगिन–पासवर्ड का प्रयोग करके आवेदन करना होगा।

टीईटी के पेंच में कैसे फंसे 1.86 लाख शिक्षक

संसद ने 4 अगस्त, 2009 को निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE-2009) कानून पारित किया। इसे 1 अप्रैल, 2010 से देशभर में लागू किया गया। इसका उद्देश्य 6 से 14 साल के हर बच्चे को कक्षा 1 से 8 तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना है।

साथ ही, शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता के रूप में टीईटी अनिवार्य किया गया। 27 जुलाई, 2011 को आदेश जारी करके प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर भर्ती के लिए टीईटी अनिवार्य सेवा शर्त बनाई गई।

हालांकि 1 सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने फैसला दिया कि जिनकी सेवा 5 साल से ज्यादा बची है, ऐसे सभी शिक्षकों को 2 साल (सितंबर 2027 तक) में टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। इससे कम सेवा वालों को छूट तो दी गई, लेकिन प्रमोशन के लिए उन्हें भी TET पास करना जरूरी कर दिया गया।

साथ में, डबल बेंच ने 2014 के कर्नाटक के प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट फैसले पर भी सवाल उठाया, जिसमें RTE Act को अल्पसंख्यक संस्थानों (सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त) से पूरी छूट दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि प्रमति ट्रस्ट के फैसले की समीक्षा जरूरी है। मामला संवैधानिक पीठ को भेज दिया गया। फिलहाल संवैधानिक पीठ गठित नहीं हुई है।

शिक्षक संगठनों का तर्क है कि RTE-2009 के तहत TET की अनिवार्यता जुलाई, 2011 से लागू हुई थी। ऐसे में इससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसे कैसे लागू किया जा सकता है। कई शिक्षक तो 20 से 25 सालों से पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी नौकरी के बाद फिर से परीक्षा लेना कहां तक तर्कसंगत है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देशभर के 21 लाख ऐसे शिक्षक आंदोलन पर मजबूर हुए। यूपी में दो शिक्षकों की मौत और शिक्षकों के आंदोलन के दबाव में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह के सामने रिव्यू पिटीशन दाखिल कर दी, जिस पर अभी सुनवाई होनी है।

आवेदन करने वाले शिक्षकों के लिए नई शर्त जुड़ी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, प्रदेश के 1.86 लाख शिक्षकों को भी टीईटी पास करना अनिवार्य है। सितंबर, 2027 से पहले टीईटी पास नहीं होने पर उन्हें नौकरी से बाहर होना पड़ेगा। ऐसे में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शिक्षकों के लिए भी आवेदन में कुछ शर्तों को जोड़ा है।

यूपीटीईटी आवेदन में बताना होगा कि क्या आप कार्यरत सरकारी शिक्षक हैं? हां, का चयन करने पर आपको शिक्षक का प्रकार, संगठन/विद्यालय का नाम, जॉइनिंग तिथि, सेवानिवृत्ति तिथि और मानव संपदा कोड भरना होगा। साथ ही आवेदन के समय नवीनतम वेतन पर्ची भी अपलोड करनी होगी।

आरक्षित की तरह EWS के लिए 83 अंक होगा पासिंग मार्क्स

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने इस बार एक बड़ा बदलाव EWS श्रेणी में किया है। EWS को भी आरक्षित वर्ग में रखा गया है। मतलब EWS श्रेणी के आवेदकों को यूपीटीईटी पास करने के लिए न्यूनतम 83 अंक लाने होंगे। पिछली बार 2022 की परीक्षा में EWS को पासिंग मार्क्स के लिए 90 अंक लाना अनिवार्य था।

50 हजार शिक्षक तो टीईटी में बैठ ही नहीं सकते

यूपीटीईटी के लिए अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता ने लगभग 50 हजार शिक्षकों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। उनके पास यूपीटीईटी में बैठने की पात्रता ही नहीं है।

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ लखनऊ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रभाकांत मिश्रा के मुताबिक, प्रदेश में वर्ष 1998 तक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती की न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट और दो साल की बीटीसी थी। प्रदेश में इस न्यूनतम योग्यता के साथ लगभग 15-20 हजार शिक्षक नौकरी कर रहे हैं।

इसके अलावा मृतक आश्रित वाले भी 15 हजार से ज्यादा शिक्षक हैं। 5 साल की सेवा के बाद उन्हें शासनादेश के मुताबिक ट्रेंड ग्रेड मिल जाता है। इसमें कई न ग्रेजुएट हैं और न ही बीटीसी पास हैं।

तीसरी श्रेणी में बीपीएड से शिक्षक की नौकरी कर रहे लोग शामिल हैं। प्रदेश में 1999 और 2004 में बीपीएड वालों की प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में बतौर शारीरिक शिक्षक पद पर नौकरी लगी है। ऐसे शिक्षकों की संख्या भी करीब 20 हजार है।

फिर शिक्षा मित्रों और इंटर कॉलेजों के शिक्षकों का क्या होगा?

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश शर्मा कहते हैं कि आरटीई-2009 एक्ट इंटर कॉलेजों में भी कक्षा 6 से 8वीं तक प्रभावी है। ऐसे में वहां 6वीं से 8वीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना होगा।

प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या भी 20 हजार से अधिक है। आखिर ये भी तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जद में आएंगे, फिर उनका क्या होगा? प्रदेश में बड़ी संख्या में मान्यता प्राप्त और निजी कॉलेज भी हैं। उन शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य होगी। फिर शिक्षा मित्रों के मामले में सरकार क्या कदम उठाएगी? क्योंकि वे भी तो कक्षा 1 से 8वीं तक के बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

दिनेश शर्मा कहते हैं कि प्रदेश में 1993 से शिक्षकों की भर्ती एनसीईटी (नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट) की तय गाइडलाइन के अनुसार हो रही है। वहीं, प्रदेश में शिक्षकों का प्रमोशन अध्यापक सेवा नियमावली 1981 के तहत वरिष्ठता के आधार पर तय है।

SIR और राष्ट्रीय जनगणना के बीच कैसे करेंगे परीक्षा की तैयारी

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के महामंत्री शिवशंकर सिंह कहते हैं, अभी शिक्षकों से शैक्षणिक कार्य के साथ–साथ एसआईआर का काम लिया गया। मई में उन्हें राष्ट्रीय जनगणना अभियान में लगाया जा रहा है। ऐसे में वे तीन महीने बाद होने वाली यूपीटीईटी की तैयारी कब करेंगे?

उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे शिक्षकों को राहत देना चाहिए। उनकी ड्यूटी राष्ट्रीय जनगणना में हटाई जानी चाहिए।

वे आगे कहते हैं कि शिक्षा समवर्ती सूची में आती है। मतलब, इस पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारें नियम बना सकती हैं। यूपी सरकार तमिलनाडु की तरह शिक्षकों के लिए टीईटी में छूट दे सकती है।

तमिलनाडु में लगभग 4 लाख सरकारी और निजी शिक्षक हैं। उसने भी यूपी की तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में रिव्यू पिटीशन दाखिल किया है। इसके अलावा उसने दो साल में शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता को देखते हुए क्वालीफाई मार्क्स कम रखते हुए एक अध्यादेश भी ले आई है। साथ ही सरकार ने दो साल में 6 TNTET (तमिलनाडु शिक्षक पात्रता परीक्षा) आयोजित कराने का निर्णय लिया है।

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