परिषदीय स्कूलों के पेयरिंग पर सुप्रीम मुहर – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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परिषदीय स्कूलों के पेयरिंग पर सुप्रीम मुहर

  प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों के पेयरिंग (युग्मन) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरी तरह से समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका को 23 मार्च को सुनवाई के दौरान खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के निर्णय को बरकरार रखा है। इससे साफ हो गया है कि राज्य सरकार की ओर से संशोधित की गई स्कूल पेयरिंग नीति के आधार पर आगे कार्यवाही की जाएगी। 50 से कम छात्र संख्या और एक किमी से कम दूरी वाले परिषदीय स्कूल की पेयरिंग में अब कोई अड़चन नहीं है।

हाईकोर्ट से अपील निस्तारित होने पर पहुंचे थे शीर्ष कोर्ट

इन संशोधित दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को स्पेशल अपील निस्तारित कर दी थी। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि भविष्य में किसी भी प्रकार की पेयरिंग इन्हीं दिशा-निर्देशों के अनुसार ही की जानी चाहिए। हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। इसमें यह दलील दी गई कि पेयरिंग की प्रक्रिया अभी भी बच्चों के अधिकारों को प्रभावित कर रही है और इसमें न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

सीतापुर के बच्चों की ओर से हुई थीं याचिकाएं

पूरा विवाद सीतापुर में कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी स्कूलों से जोड़ने (पेयरिंग) की प्रशासनिक प्रक्रिया से शुरू हुआ था। इसके खिलाफ छात्रों और अभिभावकों की ओर से हाईकोर्ट में याचिकाएं हुई थीं। प्रारंभिक सुनवाई में एकल पीठ से याचिकाएं खारिज कर दीं तो छात्र विशेष अपील के माध्यम से हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ पहुंचे। इस मामले में खंडपीठ ने 24 जुलाई 2025 को यथास्थिति का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान संशोधित किया नियम

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करते हुए 30 जुलाई 2025 को अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। 27 अगस्त 2025 को जारी विस्तृत परिपत्र में साफ किया गया कि केवल उन्हीं विद्यालयों की पेयरिंग की जाएगी, जहाँ:

  • छात्र संख्या 50 से कम है।

  • संबंधित विद्यालयों के बीच की दूरी एक किलोमीटर से कम है।

साथ ही 13 अक्टूबर 2025 को जारी एक अन्य आदेश में यह स्पष्ट कर दिया गया कि नई नीति पूरी तरह आरटीई (RTE) के मानकों के अनुरूप लागू की जा रही है।

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