उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अनुदेशकों (पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर्स) की नियुक्ति और मानदेय का मुद्दा लंबे समय से कानूनी विवादों में रहा है। हाल ही में #फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और उसके बाद उत्तर प्रदेश कैबिनेट के निर्णय ने इस स्थिति को स्पष्ट कर दिया है।
नीचे दी गई जानकारी आपकी मांग के अनुसार विस्तार और स्पष्टता के साथ दी गई है:
1. तैनाती (नियुक्ति का समय)
उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा 6 से 8) में अनुदेशकों की नियुक्ति मुख्य रूप से वर्ष 2013-14 में सर्व शिक्षा अभियान (अब समग्र शिक्षा अभियान) के तहत शुरू हुई थी।
पद का स्वरूप: यह नियुक्ति संविदा (Contractual) आधारित थी।
कार्यकाल: शुरुआत में यह अनुबंध 11 महीने के लिए था, जिसे हर साल नवीनीकृत किया जाता रहा है।
2. मानदेय की स्थिति (वास्तविक मानदेय)
मानदेय को लेकर सरकार और कोर्ट के बीच लंबी खींचतान चली है:
2013-14 (शुरुआत): मानदेय ₹7,000 प्रति माह निर्धारित था।
2016: इसे बढ़ाकर ₹8,470 किया गया था, लेकिन बाद में इसे फिर से घटाकर ₹7,000 कर दिया गया।
वर्तमान स्थिति (अप्रैल 2026 से): उत्तर प्रदेश सरकार ने कैबिनेट बैठक (7 अप्रैल 2026) में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए अनुदेशकों का मानदेय ₹17,000 प्रति माह करने की मंजूरी दे दी है।
3. कोर्ट के प्रमुख निर्णय (High Court & Supreme Court)
न्यायिक प्रक्रिया को आप इस प्रवाह चित्र के माध्यम से बेहतर समझ सकते हैं:
इलाहाबाद हाई कोर्ट का निर्णय:
एकल पीठ (Single Bench): कोर्ट ने आदेश दिया था कि अनुदेशकों को ₹17,000 मानदेय मार्च 2017 से मिलना चाहिए।
खंडपीठ (Division Bench): सरकार की अपील पर खंडपीठ ने इसे सीमित करते हुए कहा कि ₹17,000 का भुगतान केवल एक सत्र (2017-18) के लिए किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय (फरवरी 2026):
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया:
मानदेय राशि: सभी अनुदेशक ₹17,000 प्रति माह मानदेय के हकदार हैं।
लागू होने की तिथि: यह मानदेय वर्ष 2017-18 से प्रभावी माना जाएगा।
एरियर (Arrears): कोर्ट ने आदेश दिया कि 2017 से अब तक का बकाया (Arrears) अगले 6 महीनों के भीतर दिया जाए।
बेगार (Begar) पर टिप्पणी: कोर्ट ने ₹7,000 जैसे कम वेतन को ‘बेगार’ (अनुच्छेद 23 का उल्लंघन) करार दिया और कहा कि इतने कम पैसे में काम कराना जबरन श्रम के समान है।
नियमितीकरण का संकेत: कोर्ट ने यह भी कहा कि 11 महीने की संविदा बार-बार बढ़ाने के बाद कर्मचारी को केवल अस्थायी नहीं माना जा सकता।
निष्कर्ष और वर्तमान प्रभाव और सरकार इन्हें नियमित करें!
तेजस्वी शुक्ला
प्रदेश अध्यक्ष
उच्च प्राथमिक अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश
मो09670923000
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