प्रयागराज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन (Adjustment) की प्रक्रिया अब केवल डिजिटल आंकड़ों के भरोसे नहीं होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए नई समय-सीमा और कड़े मानक तय किए हैं। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करना और डेटा की विसंगतियों को समाप्त करना है।
1. ‘2-टीचर फॉर्मूला’: हर स्कूल में होंगे कम से कम दो शिक्षक
राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता अब ‘जीरो टीचर’ या ‘सिंगल टीचर’ स्कूलों को खत्म करना है। नई नीति के अनुसार:
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सरकार सबसे पहले यह सुनिश्चित करेगी कि प्रदेश के प्रत्येक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में कम से कम 2 शिक्षक अनिवार्य रूप से तैनात हों।
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जिन स्कूलों में पहले से ही दो शिक्षक मौजूद हैं, वहां फिलहाल किसी भी तरह का बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
2. UDISE डेटा की होगी जमीनी जांच (फिजिकल वेरिफिकेशन)
पूर्व में शिक्षकों ने शिकायत की थी कि यू-डायस (UDISE) पोर्टल का डेटा त्रुटिपूर्ण है। इसे गंभीरता से लेते हुए अब:
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केवल ऑनलाइन डेटा पर भरोसा न कर 30 अप्रैल 2026 तक भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाएगा।
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स्कूल के प्रधानाध्यापक (Headmaster) और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) संयुक्त रूप से डेटा को प्रमाणित करेंगे। यह उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि डेटा सटीक हो।
3. महत्वपूर्ण तिथियां और पारदर्शिता
स्थानांतरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विभाग ने एक ‘टाइमलाइन’ जारी की है:
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6 मई 2026: सत्यापित और प्रमाणित डेटा आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक (अपलोड) कर दिया जाएगा।
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13 मई 2026: जिन शिक्षकों का नाम स्थानांतरण सूची में है, वे अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
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निर्णय प्रक्रिया: आपत्तियों पर अंतिम फैसला जिला स्तर की कमेटी करेगी, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी (DM) करेंगे।
4. सरप्लस शिक्षक और महिला सुरक्षा को प्राथमिकता
इस चरण में स्थानांतरण का दायरा सीमित रखा गया है:
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केवल सरप्लस शिक्षक: अभी केवल उन्हीं शिक्षकों का तबादला होगा जो मानक से अधिक (Surplus) पाए जाएंगे। सामान्य स्थानांतरण फिलहाल प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं।
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महिला शिक्षकों को राहत: नीति में स्पष्ट किया गया है कि महिला शिक्षकों को उनके वर्तमान ब्लॉक या घर के पास ही पोस्टिंग देने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
5. न्यायालय का रुख और अगली सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि स्थानांतरण दंडात्मक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधार के लिए होने चाहिए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 मई 2026 को तय की है।
विशेष नोट: तब तक कोर्ट द्वारा दी गई पुरानी राहत या स्टे प्रभावी रहेगा। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया डेटा-आधारित और तर्कसंगत होनी चाहिए।
शासन के इस कदम से उन हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है जो तकनीकी खामियों के कारण गलत समायोजन का डर सता रहा था। अब सारा दारोमदार 30 अप्रैल तक होने वाले फिजिकल वेरिफिकेशन पर टिका है।
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