लखनऊ। प्रदेश सरकार अब ‘स्कूल चलो अभियान’ को और तेज करने जा रही है। 1 मई से इसे मिशन मोड में लागू किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जा सके।
इस अभियान के तहत 6 से 14 वर्ष तक के उन बच्चों को चिन्हित किया जाएगा जो अभी तक स्कूल नहीं जा रहे हैं या बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं। खासतौर पर श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
ड्रॉपआउट बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिलाया जाएगा। वहीं दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की सहायता से नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा।
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने निर्देश दिए हैं कि इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दिया जाए, ताकि प्रदेश का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्य सचिव स्तर से भी सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
इसके अलावा, निजी स्कूलों में आरटीई के तहत वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिलाने और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि हर पात्र बच्चे का नामांकन समय पर हो।
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