प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उन 13 अंशकालिक अनुदेशकों की सेवाओं को समाप्त करने वाले आदेश को रद्द कर दिया है, जिन्हें छात्र संख्या 100 से कम होने के आधार पर नवीनीकरण से वंचित कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने मेघा कुमार और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि स्कूलों में छात्रों की संख्या के निर्धारण के लिए केवल अंशकालिक अनुदेशकों को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं है, बल्कि अत्यंत अनुचित भी है।
कोर्ट ने कहा कि अनुदेशकों का मुख्य कार्य शिक्षण प्रदान करना है, न कि संस्थागत मामलों का संचालन करना। और छात्र संख्या में कमी के पीछे कई अन्य कारण हो सकते हैं, जो उनके नियंत्रण से बाहर होते हैं।
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