योग्यता आधारित मूल्यांकन से सुधार संभव, रिपोर्ट में सुधार के लिए 33 सिफारिशें कीं – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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‘टेम्पोरल एनालिसिस एंड पॉलिसी रोडमैप फॉर क्वालिटी एनहांसमेंट’ रिपोर्ट में सुधार के लिए 33 सिफारिशें कीं

नई दिल्ली। रट्टा आधारित परीक्षा की जगह योग्यता-आधारित मूल्यांकन से स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। नामांकन बढ़ने के बाद भी सार्थक सीखने के परिणाम प्राप्त करना एक चुनौती बनी हुई है।

गणित और उच्च-क्रम की वैचारिक समझ में भाषाई क्षमताओं की तुलना में कमी है। सिर्फ पांच फीसदी स्कूल ही कक्षा पहली से 12वीं तक की निरंतर शिक्षा प्रदान करते हैं। जबकि पांचवीं, आठवीं और 10वीं के बाद छात्रों के बीच जुड़ाव की कमी के कारण छात्र पढ़ाई छोड़ देते हैं।

स्कूली शिक्षा के सुधार के लिए केंद्र और राज्यों को साथ मिलकर काम करना होगा। सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग ने एक दशक के विश्लेषण के आधार पर स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया: टेम्पोरल एनालिसिस एंड पॉलिसी रोडमैप फॉर क्वालिटी एनहांसमेंट नामक रिपोर्ट जारी की है। खास बात है कि देश में करीब 1,04,125 स्कूल एक ही शिक्षक के सहारे हैं, जिसमें से 89 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में हैं।

दिल्ली में नीति आयोग की उपाध्यक्ष सुमन बेरी और सीईओ निधि छिब्बर ने स्कूली शिक्षा पर बड़ी डाटा रिव्यू रिपोर्ट जारी की है। इसमें 13 उप-विषयों के तहत 33 नीतिगत सिफारिशें दी गई हैं, जिन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है। इसका मकसद, शिक्षा गुणवत्ता को बेहतर बनाना और सभी छात्रों को एक जैसे अच्छे सीखने के अवसर मुहैया करवाना है।

भारतीय शिक्षा प्रणाली विश्व की सबसे बड़ी है, जिसमें 14.71 लाख स्कूल, एक करोड़ से अधिक शिक्षक हैं, जिनमें 24.69 करोड़ से अधिक छात्र पढ़ते हैं। यूडीआईएसई 2024-25, एनसीईआरटी का 2017 से 2024 तक का राष्ट्रीय सर्वेक्षण परख में डेटा, पंजीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर, इक्विटी और इन्क्लूजन, और लर्निंग आउटकम जैसे पैरामीटर पर विश्लेषण रिपोर्ट तैयार की है।

सत्र शुरू होने के एक महीने बाद भी एनसीईआरटी की किताबें नहीं, निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई

नई दिल्ली। देशभर के निजी और सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू हुए एक महीना बीत चुका है। मगर, छात्रों के पास किताबें नहीं हैं। कुछ विषयों में छात्र निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सरकार ने एनसीईआरटी को गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने से पहले सभी किताबों प्रकाशित करने का निर्देश दिया है। एनसीईआरटी को किताबों की 15 करोड़ प्रतियां छापनी थीं। इसमें से अब तक महज सात से आठ करोड़ प्रतियां छप सकी हैं। सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनसीईआरटी को जल्द किताबों की प्रतियां प्रकाशित करने को कहा है। एनसीईआरटी ने नए पाठ्यक्रम के तहत अब तक कक्षा तीसरी से नौवीं तक की संशोधित पाठ्यपुस्तकें ही जारी की हैं। अभी सभी छात्रों को किताबें नहीं मिल पाई हैं। फिलहाल छात्र पिछले साल की पाठ्यपुस्तकों से पढ़ाई कर रहे। एनसीईआरटी की तरफ से समय पर किताबों की प्रतियां प्रकाशित न करने से निजी स्कूल संचालक निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों से पढ़ाई करा रहे हैं।

पांच शैक्षणिक सिफारिशें

पांच शैक्षणिक सिफारिशों में मूल्यांकन और मूलभूत शिक्षा में परिवर्तन, समग्र शिक्षा और छात्र कल्याण पर जोर, व्यावसायिक शिक्षा और कौशल एकीकरण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) को सुदृढ़ करने और शिक्षण नवाचार के लिए एआई को एकीकृत करने पर केंद्रित हैं।

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