इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगभग 22 वर्ष पुराने कनिष्ठ लिपिक भर्ती विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए वर्ष 2004 में हुई पूरी चयन प्रक्रिया को अवैध घोषित कर दिया है। न्यायालय ने चयनित तीन अभ्यर्थियों की नियुक्तियां निरस्त करते हुए उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश दिया है। साथ ही निर्देश दिया है कि यदि पद रिक्त रहते हैं तो नई भर्ती कानून के अनुसार नए विज्ञापन के माध्यम से की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने विनय कुमार पाण्डेय की सेवा सम्बंधी याचिका पर पारित किया। मामला गवर्नमेंट वुडक्राफ्ट इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, कटरा, इलाहाबाद में वर्ष 2004 में कनिष्ठ लिपिक के दो पदों पर हुई भर्ती से संबंधित था। सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष वर्ष 2007 की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। पूरी चयन प्रक्रिया को नियमों और विज्ञापन की शर्तों के विपरीत पाया गया।
सभी तथ्यों पर विचार करते हुए न्यायालय ने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया नियमों, विज्ञापन की शर्तों तथा विधिक प्रक्रिया के विपरीत थी। इसे कायम नहीं रखा जा सकता। न्यायालय ने वर्ष 2004 के विज्ञापन के आधार पर किए गए सभी चयन रद्द करते हुए प्रतिवादी संख्या 4, 5 और 6 की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश दिया
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