प्रयागराज, । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला न्यायालयों में लंबित आपराधिक मामलों पर चिंता जताते हुए एक आदेश में कहा है कि तारीख पर तारीख वाली स्थिति के लिए केवल न्यायिक अधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं, सरकार, पुलिस तंत्र की कमियां भी मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अरुण देशवाल ने हत्यारोपी मेवालाल की जमानत याचिका पर की है। कोर्ट ने फिल्म डायलॉग ‘तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख मिलती रही….. लेकिन इंसाफ नहीं मिला… का जिक्र कर कहा कि यह डायलॉग लोकप्रिय हुआ, क्योंकि यह आम आदमी की धारणा थी। मगरइसका कारण राज्य, उसकी पुलिस भी है क्योंकि न्यायिक अफसर पर्याप्त स्टाफ मुल्ज़िमों, गवाहों की उपस्थिति,उचित एफएसएल रिपोर्ट आदि के लिए पुलिस के सहयोग बिना निर्णय नहीं कर सकता। कई न्यायिक अधिकारी न्याय देने के उद्देश्य से आते हैं, लेकिन कम स्टाफ, सम्मन, वारंट क्रियान्वयन में पुलिस की कोताही, खराब जांच, दोषपूर्ण रिपोर्ट के कारण वे प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाते। चिंता जताई कि न्यायिक अफसरों को व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी नहीं दिए जाते हैं।
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