वीबी-जी राम जी कानून एक जुलाई से लागू होगा: नया अधिनियम लागू होते ही मनरेगा खत्म हो जाएगा, नए कानून में क्या बदलाव होंगे – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि ‘विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन(वीबी-जी राम जी) अधिनियम एक जुलाई से पूरे देश में लागू हो जाएगा। इसके साथ ही दो दशक पुराना ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) खत्म हो जाएगा।

सरकार ने बताया कि, नए अधिनियम में एक नया ढांचा होगा जो ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का वैधानिक मजदूरी वाले रोजगार की गारंटी देता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक बयान में इसे भारत की ग्रामीण विकास संरचना में ऐतिहासिक परिवर्तन बताया है। मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह अधिनियम एक जुलाई से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो जाएगा और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम उसी दिन से समाप्त हो जाएगा।

समय सीमा के भीतर मिलेगा रोजगार : रोजगार निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराना होगा, ऐसा न करने पर श्रमिक अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता के पात्र बने रहेंगे। केंद्र सरकार ने कहा कि 2026-27 के लिए आवंटित 95,692.31 करोड़ रुपये ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट अनुमान आवंटन है। राज्यों के संभावित योगदान को शामिल करते हुए, कार्यक्रम का कुल व्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है।

1. काम की मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार प्रदान करना अनिवार्य होगा, ऐसा न होने पर श्रमिक बेरोजगारी भत्ते के हकदार हो जाएंगे।

2. मजदूरी का भुगतान बैंक या डाकघर खातों में डीबीटी के माध्यम से जारी रहेगा और हाजिरी रजिस्टर बंद होने के एक सप्ताह या पखवाड़े के भीतर भुगतान करने होंगे।

3. कानून में मजदूरी भुगतान में देरी के मामले में मुआवजे के प्रावधान भी बरकरार रखे गए हैं।

वेतन, शिकायत निवारण का मसौदा तैयार हो रहा

मंत्रालय ने कहा कि वेतन भुगतान, शिकायत निवारण, आवंटन के नियम और संक्रमणकालीन प्रावधानों से संबंधित नियमों का मसौदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परामर्श से तैयार किया जा रहा है। जल्द ही सार्वजनिक परामर्श के लिए प्रकाशित किया जाएगा।

‘घाेषणा सुर्खियों के लिए’

नई दिल्ली। कांग्रेस ने मनरेगा के स्थान पर लाए गए ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ के लागू करने की घोषणा को सोमवार को सुर्खियां बटोरने की कवायद करार दिया।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक पोस्ट में कहा, यह घोषणा केंद्र द्वारा सुर्खियां बटोरने की एक और कवायद है जो इस तरह की कवायदों में माहिर है।

कैसे होगा बदलाव

मनरेगा से नए कानून में बदलाव बिना किसी रुकावट के होगा। मनरेगा एक जुलाई, 2026 से निरस्त माना जाएगा।

● मौजूदा मनरेगा कार्य जारी रहेंगे उन्हें नए ढांचे में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

● मौजूदा जॉब कार्ड उनके लिए अस्थायी रूप से मान्य रहेंगे, जिनका ई-केवाईसी पहले ही पूरा हो चुका है।

नए ढांचे में बदलाव से श्रमिकों को परेशानी नहीं

अधिसूचना में मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि मनरेगा से नए ढांचे में बदलाव की वजह से श्रमिकों को कोई परेशानी नहीं होगी। 30 जून तक मनरेगा के तहत चल रहे काम सुरक्षित रहेंगे। वे बिना किसी रुकावट के नए ढांचे में स्थानांतरित हो जाएंगे। मौजूदा ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक वैध रहेंगे। जॉब कार्ड के बिना श्रमिक ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण कराना जारी रख सकते हैं। कहा, लंबित ई-केवाईसी के कारण श्रमिकों को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा।

फंडिंग कैसे और कहां से हाेगी

● पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10।

● अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 60:40

● बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय फंडिंग।

● मनरेगा के तहत, मजदूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाता था, जबकि सामग्री लागत केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 के अनुपात में साझा की जाती थी।

नए कानून में क्या बदलाव होंगे

नए अधिनियम के तहत हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के गारंटीकृत मजदूरी रोजगार का अधिकार मिलेगा। यह मनरेगा के तहत 100 दिन था। इसमें कामों की चार श्रेणियां हैं, जल सुरक्षा परियोजनाएं, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से संबंधित बुनियादी ढांचा और मौसम की अत्यधिक मार से बचाव के काम।

नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने इस कानून को अगली पीढ़ी के ग्रामीण विकास ढांचे के रूप में पेश किया है। हालांकि, विपक्षी पार्टियों और श्रम अधिकार कार्यकर्ताओं ने मनरेगा को निरस्त करने पर चिंता जताई है।

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