देशभर के हजारों कार्यरत शिक्षकों की नजरें जिस मामले पर टिकी हुई थीं, उस TET अनिवार्यता प्रकरण में आज माननीय सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। जस्टिस दत्ता की डिवीजन बेंच के समक्ष दर्जनों रिव्यू पिटीशनों पर बहस हुई, जिसमें कोर्ट की टिप्पणियों से यह साफ संकेत मिला कि बिना TET शिक्षकों को राहत मिलना बेहद कठिन दिखाई दे रहा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “बच्चों के भविष्य और quality education से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।” अदालत ने माना कि NCTE द्वारा पहले 5 वर्ष, फिर 2 वर्ष और अब 2025 में भी अतिरिक्त समय दिया जा चुका है। ऐसे में बार-बार छूट देने का औचित्य कमजोर पड़ता है।
Proviso 1 और 2 पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले में सबसे अधिक चर्चा Proviso 1 और Proviso 2 को लेकर हुई। कोर्ट ने कहा कि इन प्रावधानों के आधार पर ही TET अनिवार्यता लागू रहेगी और बिना TET नौकरी जारी रखना संभव नहीं माना जा सकता।
हालांकि बेंच ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया — क्या NCTE या केंद्र सरकार TET से छूट दे सकती है?
इस बिंदु को लेकर अंतिम आदेश में कुछ स्पष्टता आने की संभावना जताई जा रही है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि B.Ed., BTC जैसी अन्य योग्यताएं अलग विषय हैं, लेकिन TET एक अनिवार्य पात्रता है। न्यायालय के अनुसार किसी भी शिक्षक की नियुक्ति के समय आवश्यक qualifications पूरी होनी चाहिए।
“Provided” शब्द पर हुई बहस
सुनवाई के दौरान proviso में प्रयुक्त “provided” शब्द पर भी चर्चा हुई। कोर्ट ने संकेत दिया कि यह प्रावधान कार्यरत शिक्षकों को सीमित समय देने के उद्देश्य से था, न कि नई नियुक्तियों को बिना TET वैध ठहराने के लिए।
बेंच ने prospective और retrospective प्रभाव की दलीलों को भी विशेष महत्व नहीं दिया। कोर्ट ने कहा कि RTE Act और NCTE के निर्देशों में पर्याप्त समय पहले ही दिया जा चुका है।
Article 21A का उल्लेख
सुनवाई में Article 21A का भी उल्लेख हुआ। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा अब केवल सरकारी नीति नहीं बल्कि एक Fundamental Right है। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना राज्य और संस्थाओं की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
समय बढ़ सकता है, छूट मुश्किल
जस्टिस दत्ता ने सुनवाई के दौरान 01 सितंबर 2027 की समयसीमा का भी उल्लेख किया। इससे संकेत मिले कि कोर्ट संभवतः कार्यरत शिक्षकों को TET पास करने के लिए कुछ अतिरिक्त समय दे सकता है, लेकिन पूर्ण छूट मिलने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।
महिला शिक्षक संघ की ओर से TET परीक्षा समय पर कराने की मांग उठाई गई, जिस पर कोर्ट ने कहा कि यह सरकार का विषय है।
आदेश सुरक्षित
सूत्रों के अनुसार, कोर्ट आज आदेश सुरक्षित रख सकता है और विस्तृत फैसला आने वाले दिनों में जारी किया जा सकता है। फिलहाल हुई बहस और न्यायाधीशों की टिप्पणियों के आधार पर यही अनुमान लगाया जा रहा है कि सेवा में बने रहने के लिए TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य रहेगा।
अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हुई हैं, जो लाखों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
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