लखनऊ। प्रदेश में श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रम विभाग संचालित बाल श्रमिक विद्या योजना को अब उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने के निर्देश दिए हैं। अभी तक यह योजना केवल 20 जिलों में संचालित की जा रही थी।
8 से 18 वर्ष तक के कामकाजी बच्चों को मिलेगा लाभ
योजना के तहत 8 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाएगा। साथ ही उन्हें आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी, ताकि आर्थिक मजबूरी के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालयों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के सहयोग से इन बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना भी तैयार की जाए।
श्रमिक सुविधा केंद्र और रोजगार व्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक में ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बड़े और औद्योगिक शहरों में आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र विकसित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्थाएं युवाओं और कुशल कामगारों के लिए नए रोजगार अवसर तैयार कर रही हैं। वर्ष 2021 से संचालित इस व्यवस्था के तहत नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।
हजारों सेवा प्रदाता और कुशल कामगार जुड़े
बैठक में जानकारी दी गई कि वर्तमान में पोर्टल पर 1097 सेवा प्रदाता, 5049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के अनुकूल वातावरण और श्रमिक हितों के बीच संतुलन बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
वर्ष 2020 में शुरू हुई थी योजना
बाल श्रमिक विद्या योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी। योजना का उद्देश्य बाल श्रमिकों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना है। अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किए जाने से हजारों बच्चों को शिक्षा और बेहतर जीवन का अवसर मिल सकेगा।
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