समायोजन मामले में हाईकोर्ट सख्त: 20 जून तक निस्तारित होंगी आपत्तियां, 3 जुलाई तक ट्रांसफर पर रोक – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया कि विभिन्न जिलों से शिक्षकों की बड़ी संख्या में आपत्तियाँ प्राप्त हुई हैं, जिनका सत्यापन और निस्तारण किया जा रहा है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन विद्यालयों में वास्तव में अधिशेष शिक्षक हैं। 

30 अप्रैल 2026 की कट-ऑफ तिथि के बाद नए प्रवेश होने से छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) बदल गया है, इसलिए व्यक्तिगत आपत्तियों पर जिला स्तरीय समिति (District Level Committee) विचार कर सकेगी। 

न्यायालय को बताया गया कि:

आपत्तियों के निस्तारण हेतु कम से कम 15 दिन चाहिए।

उसके बाद अधिशेष शिक्षकों की व्यापक सूची तैयार करने हेतु 10 दिन और लगेंगे।

प्रत्येक विद्यालय में कम से कम दो शिक्षक बनाए रखने के सिद्धांत का पालन किया जाएगा। 

न्यायालय ने निर्देश दिया कि अधिशेष शिक्षकों की पहचान पूरे राज्य में समान रूप से “First-In First-Out” सिद्धांत से की जाएगी। अर्थात जो शिक्षक पहले नियुक्त हुआ है, उसे बाद में नियुक्त शिक्षक की तुलना में प्राथमिकता मिलेगी।

कक्षा 6 से 8 के विषय अध्यापकों के मामले में यह सिद्धांत विषयवार लागू होगा। 

न्यायालय ने यह भी कहा कि:

जिला मजिस्ट्रेट पहले सभी सूचियों का सत्यापन करेंगे।

यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो सुधार और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

यह कार्य 10 दिनों में पूरा किया जाए। 

सभी आपत्तियों का निस्तारण 20 जून 2026 तक करने का निर्देश दिया गया। 

जिन शिक्षकों को अंतरिम आदेश (stay/interim protection) प्राप्त है:

उनकी अलग स्थिति दर्ज की जाएगी।

उनके स्थान पर अगली पंक्ति के शिक्षक का नाम वैकल्पिक रूप से प्रस्तावित किया जा सकता है। 

यदि किसी शिक्षक की आपत्ति दाखिल करने की तिथि तक छात्र-शिक्षक अनुपात बदल चुका हो और वह तथ्य सही पाया जाए, तो जिला समिति उस परिवर्तन को ध्यान में रख सकेगी।

अन्य किसी स्थिति में 30 अप्रैल 2026 के बाद के आंकड़ों पर विचार नहीं होगा। 

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि:

अगली सुनवाई तक कोई स्थानांतरण (transfer/redeployment) नहीं होगा।

तैयार सूची अगली तारीख पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। 

न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए गए शिक्षकों की अलग सूची प्रस्तुत करे तथा यह सुनिश्चित करे कि शिक्षकों को लंबे समय तक गैर-शैक्षणिक कार्यों में न लगाया जाए, क्योंकि उनका मुख्य कार्य विद्यार्थियों को शिक्षा देना है। 

अगली सुनवाई की तिथि 3 जुलाई 2026 निर्धारित की गई तथा पूर्व में दिया गया अंतरिम आदेश अगली तिथि तक बढ़ा दिया गया।

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