मैदानों में लू के थपेड़े, पहाड़ों पर भी छूटे पसीने, लोग बेहाल – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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नई दिल्ली/शिमला। देश इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों तक सूरज की तपिश ने लोगों को बेहाल कर दिया है। आईएमडी के अनुसार, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी भागों में अगले तीन से चार दिनों तक भीषण लू का प्रकोप जारी रहेगा, जबकि हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों पर भी अगले दो दिनों तक गर्मी का असर तेज रहेगा। हालांकि, 28 मई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है।

इससे मैदानी इलाकों में आंधी-बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर शुरू होगा, जिससे 29 मई से तापमान में बड़ी गिरावट आएगी। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और विदर्भ (महाराष्ट्र) के कई हिस्सों में पारा 43 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच झुलसा रहा है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला सहित कई पर्वतीय इलाकों में गर्मी का असर तेज हो गया है। आईएमडी के मुताबिक, 27 मई को प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा। इससे तापमान में दो से पांच डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सोलन, शिमला और सिरमौर जिलों के कुछ इलाकों में लू को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। पिछले 24 घंटों में ऊना 41.6 डिग्री सेल्सियस के साथ हिमाचल का सबसे गर्म इलाका रहा, जबकि लाहौल-स्पीति के केलांग में न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

प्रशांत महासागर में हवाएं पूर्व से पश्चिम चलती हैं और गर्म पानी को भारत-इंडोनेशिया की तरफ धकेलती हैं। जब ये हवाएं कमजोर हो जाती हैं, तो समुद्र का पानी उलटी दिशा में अमेरिका और पेरू के तटों की तरफ रुक जाता है। जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री बढ़ता है, तो उसे अल नीनो कहते हैं।

लेकिन जब यह 2 डिग्री या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तो उसे सुपर अल नीनो कहा जाता है। यह मानसून, समुद्री धाराओं, तापमान, गर्मी, चक्रवात के साथ ही खाद्य कीमतों पर व्यापक असर डालता है। भारत में इसका असर रहता है।

खेत और किसान

भारत की आधी से ज्यादा खेती सीधे तौर पर मानसून पर निर्भर है। पानी की कमी के कारण धान (चावल), मक्का, सोयाबीन, गन्ना और दालों की बुवाई और पैदावार बुरी तरह प्रभावित होती है।

मानसून और सूखा

सुपर अल नीनो के कारण भारत में मानसून की बारिश सामान्य से काफी कम हो सकती है। देश के कई हिस्सों विशेषकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। भारत में जून से सितंबर के बीच औसतन 870 एमएम बारिश होती है। लेकिन आईएमडी के अनुसार, 2026 में अल नीनो के कारण यह घट सकती है।

सुपर अल नीनो पूरी दुनिया के मौसम को दो हिस्सों में बांट देता है। कहीं भारी सूखा तो कहीं विनाशकारी बाढ़ आती है। इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में भयानक सूखा पड़ता है। पानी की कमी के कारण ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील के अमेजन जंगलों में भीषण आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। जहां एक तरफ सूखा होता है, वहीं दूसरी तरफ पेरू, इक्वाडोर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बारिश और विनाशकारी बाढ़ आती है। वहीं, दुनिया भर में खेती प्रभावित होने से कॉफी, कोको, सोयाबीन और ताड़ के तेल जैसी वैश्विक चीजों के दाम बढ़ जाते हैं।

इससे मंदी और महंगाई का खतरा बढ़ जाता है।

खाद्य महंगाई में उछाल

जब फसलों का उत्पादन घटता है, तो बाजार में अनाज, दालों, सब्जियों और चीनी के दाम तेजी से बढ़ने लगते हैं। इससे आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ जाता है।

2016 से आए अल-नीनो

● 2015-2016 : यह इतिहास का सबसे खतरनाक सुपर अल नीनो था, जिसने 2016 को उस समय का सबसे गर्म साल बना दिया था।

● 2023-2024 : बीते इस अल नीनो और इंसानी गतिविधियों के कारण साल 2024 ने गर्मी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

● 2026 (वर्तमान स्थिति): वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2026 के मध्य में जो सुपर अल नीनो उभर रहा है।

वह पिछले 140 वर्षों का सबसे भीषण अल नीनो हो सकता है।

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