8वां केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission): अब तक की पूरी कहानी – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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8वाँ केंद्रीय वेतन आयोग: अब तक का संपूर्ण विवरण

​8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के परामर्श (Consultations) जोरों पर हैं—ये वे विचार-विमर्श हैं जो भारत में कम से कम 1.15 करोड़ लोगों के जीवन को प्रभावित करेंगे। लेकिन इसका कार्य क्या है? यह कैसे काम करता है? और इसकी शुरुआत कब हुई?

​सरल शब्दों में, वेतन आयोग भारत सरकार द्वारा गठित एक पैनल है, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों (नागरिक और रक्षा) तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों (पेंशनभोगियों) के वेतन ढांचे में बदलाव की सिफारिश करता है।

​यह सफर 1946 में भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद शुरू हुआ था और तब से अब तक सात वेतन आयोग लागू किए जा चुके हैं।

​अब सरकार ने नई दिल्ली में मुख्यालय के साथ 8वें वेतन आयोग का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसे 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देने का कार्य सौंपा गया है।

​परामर्श चरण (Consultation Phase)

​8वाँ वेतन आयोग वर्तमान में एक महत्वपूर्ण परामर्श चरण में है। देश भर में कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी समूहों और अन्य हितधारकों के साथ बैठकें हो रही हैं। केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी फिटमेंट फैक्टर, वेतन वृद्धि, वार्षिक वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता (DA), पेंशन और भत्तों से संबंधित चर्चाओं पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

​अब तक के मुख्य घटनाक्रम:

​गहन चर्चाएं: दिल्ली में रक्षा और रेलवे संघों के हितधारकों के साथ गहन परामर्श शुरू हो गया है। ये बैठकें अंतिम सिफारिशें तैयार करने से पहले कर्मचारी संगठनों और अन्य प्रतिनिधियों से फीडबैक लेने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

​क्षेत्रीय बैठकें: इसने तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में क्षेत्रीय परामर्श यात्राओं की घोषणा की है। आने वाले महीनों में अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी बैठकें होने की उम्मीद है।

​समय सीमा विस्तार: एक बड़ा बदलाव यह है कि ज्ञापन (Memorandum) जमा करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दी गई है।

​वेतन वृद्धि की मांग: बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत के बीच प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम मूल वेतन में भारी वृद्धि की मांग की है।

​फिटमेंट फैक्टर: यह एक गणितीय गुणक (multiplier) है। 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 है। हालांकि 8वें वेतन आयोग के लिए इसे आधिकारिक तौर पर अंतिम रूप नहीं दिया गया है, लेकिन विभिन्न रिपोर्टों में इसे 2.28 से 3.83 के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है।

​वार्षिक वेतन वृद्धि: वर्तमान 3 प्रतिशत की दर के बजाय, कई संगठनों ने 5 से 6 प्रतिशत तक वृद्धि की मांग की है।

​पेंशन सुधार: कई यूनियनों ने पेंशन समानता, मुद्रास्फीति-लिंक्ड वेतन प्रणाली और डीए गणना में बदलाव की मांग की है।

​ज्ञापन जमा करना

​तीन प्रमुख संगठनों—नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF)—ने पहले ही ज्ञापन सौंप दिए हैं। वेतन संशोधन के अलावा, यूनियनें उच्च मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) में संशोधन, तेज पदोन्नति और सरल वेतन ढांचे की मांग कर रही हैं।

​प्रमुख प्रस्ताव

​NC-JCM: बढ़ती लागतों का हवाला देते हुए 3.83 फिटमेंट फैक्टर के साथ 69,000 रुपये के न्यूनतम मूल वेतन का प्रस्ताव दिया है।

​भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ: 72,000 रुपये का न्यूनतम वेतन, 4.0 फिटमेंट फैक्टर और उच्च वार्षिक वेतन वृद्धि की मांग की है।

​शिक्षक समूह: उच्च HRA, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की मांग की है।

​आयोग का गठन और कार्यक्षेत्र

​3 नवंबर 2025 को सरकार ने आयोग के गठन की घोषणा की। इसमें न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) देसाई को अध्यक्ष, प्रो. घोष को अंशकालिक सदस्य और आईएएस अधिकारी जैन को सदस्य-सचिव नियुक्त किया गया।

​आयोग को सौंपे गए मुख्य कार्य:

​वेतन और भत्ते: केंद्र सरकार के कर्मचारियों, अखिल भारतीय सेवाओं, रक्षा बलों, केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों, सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के कर्मचारियों और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों के लिए वेतन, भत्तों और सुविधाओं की समीक्षा करना।

​कार्य संस्कृति: सरकारी सेवा में प्रतिभा को आकर्षित करने, दक्षता, जवाबदेही और जिम्मेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक वेतन ढांचा तैयार करना।

​बोनस: प्रदर्शन और उत्पादकता में सुधार के लिए बोनस योजनाओं की समीक्षा करना।

​पेंशन: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और पुरानी पेंशन के तहत कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और पेंशन की समीक्षा करना।

​आयोग अपनी सिफारिशें करते समय देश की आर्थिक स्थिति, राजकोषीय विवेक (Fiscal Prudence) और राज्य सरकारों के वित्त पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखेगा। आयोग का मुख्यालय दिल्ली में है और यह अपनी सिफारिशें 18 महीने के भीतर देगा।

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