सत्यापन में यूपीटीईटी के 200 प्रमाणपत्र फर्जी व संदिग्ध, नियमानुसार होगी कार्रवाई – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के प्रमाण पत्रों के सत्यापन में 200 प्रमाणपत्र फर्जी व संदिग्ध पाए गए हैं। ये प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) द्वारा वर्ष 2011 से 2021 के बीच जारी किए गए थे। इनकी जांच जून 2025 से मई 2026 के बीच की गई है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार शिकायतों के आधार पर गाजियाबाद, गोंडा, देवरिया, अमेठी, शामली, संभल, बलरामपुर, मैनपुरी, फिरोजाबाद, सीतापुर, मथुरा, गाजीपुर, भदोही, बलिया और लखीमपुर खीरी समेत कई जिलों से भेजे गए मामलों की जांच की गई। जांच में बड़ी संख्या में गड़बड़ियां सामने आई हैं।

नाम अथवा अन्य विवरणों में नियमानुसार होगा संशोधन
पीएनपी के रजिस्ट्रार विजेंद्र सिंह का कहना है कि नाम अथवा अन्य विवरणों में संशोधन नियमानुसार ही किया जा सकता है। नियुक्ति प्राप्त करने के बाद किए जाने वाले संशोधन संबंधी मामलों की अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर जांच की जाती है।

हाल ही में सीतापुर जनपद से सात शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए पीएनपी भेजे गए थे। जांच में सभी प्रमाणपत्र असत्य पाए गए। पीएनपी के अनुसार पांच शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत किए गए अनुक्रमांक विभागीय अभिलेखों में आवंटित ही नहीं थे जबकि दो अन्य मामलों में प्रस्तुत अनुक्रमांक अन्य अभ्यर्थियों के नाम पर दर्ज पाए गए।

इस संबंध में जांच रिपोर्ट 26 फरवरी 2026 तथा 12 मई 2026 को संबंधित जिले को भेजी गई। इसी प्रकार गोंडा जनपद से भेजे गए पांच शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्रों में भी विसंगति सामने आई है। हालांकि संबंधित रिपोर्ट अभी जिले को प्रेषित किए जाने की प्रक्रिया में है।

वर्ष 2011 की यूपीटीईटी परीक्षा का आयोजन माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कराया था जबकि वर्ष 2013 से 2021 तक परीक्षा का संचालन उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) द्वारा किया गया। बाद में इस व्यवस्था का दायित्व उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग को सौंप दिया गया। उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि जिलों से प्राप्त सत्यापन अनुरोधों के आधार पर प्रमाणपत्रों की जांच की जाती है।

केस एक
देवरिया जिले के निवासी एक युवक की हाल ही में बिहार में अध्यापक पद पर नौकरी लग गई। उसने अपने नाम में संशोधन कराने के लिए पीएनपी में संपर्क किया। जहां मना कर दिया गया तो उसने सीबीएसई बोर्ड में अपने नाम में संशोधन करा लिया। पीएनपी ने स्पष्ट तौर पर मना कर दिया कि वह संशोधन नहीं कर सकते क्योंकि नियुक्ति होने के पहले इन्होंने कोई संशोधन नहीं कराया।

केस दो
आजमगढ़ का एक युवक हाल ही पीएनपी कार्यालय में आवेदन दिया कि उसका नाम लड़की के नाम पर सर्टिफिकेट में दर्ज हो गया है। जिस युवती का उसने नाम बताया वह उसकी बहन ही थी। अधिकारियों को आशंका हुई कि वह अपनी बहन के सर्टिफिकेट में संशोधन कराकर नौकरी हासिल करने की जुगत में है। सीतापुर में एक मामले में ऐसे ही भाई-बहन फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी हासिल कर चुके थे।

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