यूनिवर्सिटी में शिक्षक भर्ती: योग्यता का संकट! शिक्षक पदों के लिए अधिकांश आवेदक अनफिट, कई विभागों में एक भी पात्र नहीं – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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रज्जू भैया यूनिवर्सिटी में शिक्षक भर्ती: योग्यता का संकट! प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पदों के लिए अधिकांश आवेदक अनफिट, कई विभागों में एक भी पात्र नहीं

प्रयागराज:

प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय (PRSU) से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और योग्य उम्मीदवारों की उपलब्धता को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शुरू की गई नियमित शिक्षक भर्ती के तहत जब आवेदनों की स्क्रीनिंग की गई, तो प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर जैसे वरिष्ठ पदों के लिए योग्य अभ्यर्थियों का भारी अकाल देखने को मिला। स्क्रूटनी के बाद जारी प्रोविजनल सूची में अधिकांश आवेदक अयोग्य (अपात्र) पाए गए हैं, जिसके बाद शिक्षा जगत में उच्च शैक्षणिक योग्यताओं के स्तर को लेकर गंभीर चर्चाएं छिड़ गई हैं।

विश्वविद्यालय ने पिछले साल 24 अप्रैल 2025 को विभिन्न विभागों में कुल 67 शैक्षणिक पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे थे। इनमें प्रोफेसर के 20 पद, एसोसिएट प्रोफेसर के 21 पद और असिस्टेंट प्रोफेसर के 26 पद शामिल थे। लंबे समय से चल रही स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब परिणाम घोषित किए गए, तो आंकड़े चौंकाने वाले निकले।

प्रोफेसर पद: 40 आवेदक अयोग्य, विधि-फार्मेसी समेत कई विभागों में ‘शून्य’ पात्रता

आधिकारिक विवरण के अनुसार, प्रोफेसर के 20 रिक्त पदों के लिए आए आवेदनों में से महज 18 अभ्यर्थियों को ही अनंतिम (प्रोविजनली) रूप से योग्य पाया गया है, जबकि 40 आवेदकों को सीधे तौर पर अपात्र घोषित कर खारिज कर दिया गया है।

हालत यह है कि विधि (Law), फार्मेसी, दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र और मनोविज्ञान एवं व्यवहार विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विभागों में प्रोफेसर पद के लिए एक भी उम्मीदवार स्क्रीनिंग की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका। आंकड़ों के मुताबिक:

  • विधि विभाग: सभी 6 आवेदक अपात्र पाए गए।

  • राजनीति विज्ञान: सभी 3 आवेदक खारिज।

  • फार्मेसी व दर्शनशास्त्र: 2-2 आवेदक थे, सभी अयोग्य घोषित।

  • समाजशास्त्र व मनोविज्ञान: 2-2 आवेदक थे, सभी फेल।

  • अंग्रेजी: 8 आवेदकों में से 6 अपात्र, केवल 2 पात्र।

हालांकि, कुछ विभागों में स्थिति थोड़ी बेहतर रही। हिंदी विभाग में सबसे ज्यादा 6 अभ्यर्थियों को प्रोविजनली पात्र पाया गया है (जबकि 7 अपात्र रहे)। इसके अलावा रक्षा अध्ययन में 4 में से 1, शिक्षा संकाय में 4 में से 3 और संस्कृत में एकमात्र आवेदक को पात्र घोषित किया गया है।

एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर भी वही हाल, असिस्टेंट प्रोफेसर में राहत

योग्यता का यह संकट सिर्फ प्रोफेसर पद तक सीमित नहीं है, बल्कि एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर भी कमोबेश यही स्थिति बनी हुई है। प्राचीन इतिहास विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के लिए आए 17 आवेदनों में से 12 को अयोग्य घोषित कर दिया गया है, सिर्फ 5 ही अपनी जगह बना पाए हैं। इसी तरह विधि विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के लिए आए 12 आवेदनों में से 11 अपात्र मिले। मैनेजमेंट में 6 में से 5 और फार्मेसी में आवेदन करने वाले सभी 4 अभ्यर्थी अनफिट पाए गए।

वरिष्ठ पदों पर जहां योग्य उम्मीदवारों का टोटा दिखा, वहीं राहत की बात यह रही कि असिस्टेंट प्रोफेसर के 26 पदों के लिए प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी में अधिकांश उम्मीदवार पात्र पाए गए हैं।

6 जून तक दर्ज करा सकते हैं आपत्ति

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वेबसाइट पर अपलोड की गई यह सूची पूरी तरह से अनंतिम (प्रोविजनल) है। यदि किसी अभ्यर्थी को अपनी पात्रता या अपात्रता की स्थिति को लेकर कोई शिकायत या आपत्ति है, तो वह 6 जून 2026 तक विश्वविद्यालय के समक्ष अपना प्रत्यावेदन/प्रतिनिधित्व प्रस्तुत कर सकता है।

तय समय सीमा के भीतर प्राप्त होने वाली सभी आपत्तियों के बारीकी से निस्तारण के बाद ही अंतिम (फाइनल) पात्रता सूची जारी की जाएगी। इसके बाद ही विश्वविद्यालय में लंबे समय से खाली चल रहे इन पदों पर साक्षात्कार और नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

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