नई दिल्ली, एजेंसी। संसद की एक समिति ने उच्च शिक्षा के लिए मौजूदा बजटीय आवंटन को अपर्याप्त करार दिया। समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप शिक्षा पर व्यय बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का छह प्रतिशत करने की अनुशंसा की।
राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने मंगलवार को उच्च शिक्षा विभाग की वर्ष 2025-26 की अनुदान मांगों पर आधारित अपनी रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को सौंपी। समिति ने कहा कि वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 के लिए उच्च शिक्षा विभाग के बजट आवंटन में हुई वृद्धि पिछले साल के मुकाबले कम रही। समिति का मानना है कि मुद्रास्फीति को देखते हुए बजटीय आवंटन में कम से कम आठ से 10 प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए। समिति ने यह भी कहा कि वर्ष 2018 से 2023 के दौरान पुरुषों और महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात रोजगार तथा मानव संसाधन के समुचित विकास के उद्देश्य से उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज नहीं कर सका है।
परीक्षा अनियमितताओं पर चिंता : संसदीय समिति ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद परीक्षाओं में अनियमितताओं के जारी रहने पर चिंता व्यक्त की है और शिक्षा मंत्रालय से उच्चस्तरीय समिति द्वारा सुझाए गए सुधारों के क्रियान्वयन के लिए समयबद्ध रोडमैप जारी करने की सिफारिश की है।
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