उत्तर प्रदेश के दौरे पर आए आठवें वेतन आयोग के दल की ओर से बातचीत के लिए न बुलाए जाने पर राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों और बिजली कर्मियों के संगठनों ने विरोध जताया है। प्रेस क्लब में रविवार को पत्रकारों से बातचीत में ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने इसे भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आयोग अखिल भारतीय सेवा के कार्मिकों से वार्ता कर रहा है, लेकिन राज्य कर्मचारियों को अवसर नहीं दे रहा।
दुबे ने बताया कि वेतन आयोग की सिफारिशों का वित्तीय भार राज्यों पर पड़ता है। इसलिए राज्य कर्मियों का पक्ष सुने बिना न्यायपूर्ण रिपोर्ट संभव नहीं। यूपी में पांचवें वेतन आयोग के बाद से राज्य कर्मियों का वेतन केंद्र के आयोगों की संस्तुतियों पर आधारित है। राज्य में वेतन पुनरीक्षण के लिए कोई अलग आयोग नहीं बना। आठवें वेतन आयोग की संस्तुतियों का सीधा असर लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा।
दिल्ली में आयोग के अध्यक्ष से मिलकर रखेंगे अपना पक्ष
उन्होंने आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों की स्थिति पर भी विचार की मांग की। संयुक्त प्रेस वार्ता में संगठनों ने आठवें वेतन आयोग के अध्यक्ष को संयुक्त ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया। वे दिल्ली में आयोग के अध्यक्ष से भेंट कर अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे। कर्मचारी संगठनों ने तत्काल वार्ता का समय देने की मांग की। यह आवश्यक है ताकि इन कर्मचारियों की समस्याएं आयोग के समक्ष रखी जा सकें।
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