लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राजकीय शिक्षकों ने वेतन विसंगतियों को दूर करने और महंगाई के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ग्रेड वेतन एवं वेतनमान में सुधार की मांग उठाई है। शिक्षकों के विभिन्न संगठनों ने अपनी मांगों और सुझावों को शासन तथा संबंधित आयोगों के समक्ष भेजा है।
शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से वेतन संरचना में अपेक्षित संशोधन नहीं होने के कारण समान कार्य करने वाले कई शिक्षकों के वेतन में अंतर बना हुआ है। इससे न केवल आर्थिक असंतोष बढ़ रहा है बल्कि पदोन्नति के बाद मिलने वाले वित्तीय लाभ भी प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षकों ने चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान में अतिरिक्त वेतन वृद्धि, वेतन विसंगतियों के निस्तारण तथा ग्रेड वेतन में बढ़ोतरी की मांग की है।
शिक्षक संगठनों का तर्क है कि वर्तमान समय में महंगाई, शिक्षा संबंधी खर्च और पारिवारिक जिम्मेदारियां लगातार बढ़ी हैं। ऐसे में वेतन संरचना का पुनरीक्षण आवश्यक हो गया है। उनका मानना है कि वेतन में वृद्धि होने से कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। हाल ही में आठवें वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारी संगठनों ने भी इसी प्रकार के तर्क रखे हैं।
शिक्षकों ने सुझाव दिया है कि वरिष्ठता, पदोन्नति और सेवा अवधि के आधार पर मिलने वाले वित्तीय लाभों को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान और अन्य भत्तों के पुनरीक्षण पर भी विचार किया जाए, ताकि राजकीय शिक्षकों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि आगामी वेतन आयोग की सिफारिशों और शासन स्तर पर होने वाली समीक्षा में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल शिक्षकों द्वारा भेजे गए सुझावों पर संबंधित विभागों में विचार-विमर्श की प्रक्रिया जारी है।
मुख्य मांगें:
- ग्रेड वेतन में वृद्धि।
- चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान में अतिरिक्त वेतन वृद्धि।
- वेतन विसंगतियों का समाधान।
- पदोन्नति के साथ वित्तीय लाभ सुनिश्चित करना।
- महंगाई के अनुरूप वेतन एवं भत्तों का पुनरीक्षण।
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