अंग्रेजी माध्यम के परिषदीय स्कूलों में हिंदी में पढ़ाई! शिक्षक और संसाधनों की कमी से प्रभावित हो रहा प्रयोग – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के परिषदीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश में वर्ष 2017 से चरणबद्ध तरीके से अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किए गए लगभग 16 हजार प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अपेक्षित स्तर पर अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। कई विद्यालयों में अब भी अधिकांश शिक्षण कार्य हिंदी माध्यम में ही संचालित होने की बात सामने आ रही है।

अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में कई चुनौतियां

रिपोर्ट के अनुसार, अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के सामने सबसे बड़ी समस्या अंग्रेजी पुस्तकों और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी है। कई स्कूलों को सभी विषयों की अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें समय पर उपलब्ध नहीं हो पातीं। इसके अलावा अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने के लिए चयनित शिक्षकों का बाद में अन्य विद्यालयों में स्थानांतरण या समायोजन भी कर दिया गया, जिससे व्यवस्था प्रभावित हुई है।

चयन अंग्रेजी माध्यम के लिए, तैनाती हिंदी माध्यम में

बताया गया है कि अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के लिए शिक्षकों का चयन और प्रशिक्षण तो किया गया, लेकिन बाद में समायोजन और स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान कई शिक्षकों को हिंदी माध्यम के विद्यालयों में भेज दिया गया। इससे अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी पैदा हो गई।

उच्च प्राथमिक स्तर पर बढ़ रही समस्या

विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक स्तर तक किसी तरह अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई संचालित हो जाती है, लेकिन कक्षा 6 से 8 में अंग्रेजी माध्यम के उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या कम होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई की निरंतरता प्रभावित होती है। ऐसे में छात्र आगे की कक्षाओं में अंग्रेजी माध्यम का लाभ नहीं ले पाते।

कंपोजिट स्कूल मॉडल पर जोर

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंग्रेजी माध्यम की व्यवस्था कंपोजिट विद्यालयों (जहां प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय एक ही परिसर में संचालित हों) में लागू की जाए तो विद्यार्थियों को कक्षा 1 से 8 तक एक समान वातावरण मिल सकता है। इससे अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।

शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल

शिक्षक संगठनों का कहना है कि अंग्रेजी माध्यम योजना का उद्देश्य अच्छा था, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त संसाधन, प्रशिक्षित शिक्षक और पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराना आवश्यक है। उनका कहना है कि जब तक इन मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक अंग्रेजी माध्यम विद्यालय अपने उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाएंगे।

प्रमुख बिंदु

  • प्रदेश में लगभग 16 हजार परिषदीय विद्यालय अंग्रेजी माध्यम घोषित।
  • कई विद्यालयों में अभी भी हिंदी माध्यम में हो रही पढ़ाई।
  • अंग्रेजी पुस्तकों और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी बड़ी चुनौती।
  • समायोजन और स्थानांतरण से प्रभावित हुई व्यवस्था।
  • कक्षा 6 से 8 तक अंग्रेजी माध्यम की निरंतरता पर सवाल।
  • कंपोजिट स्कूल मॉडल को बताया जा रहा बेहतर विकल्प।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने के लिए दीर्घकालिक योजना, पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक होगा, तभी यह प्रयोग अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त कर सकेगा।

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