69,000 vacancy ruckus ~
मीटिंग मीटिंग का खेल तो होता रहेगा लेकिन हक़ीक़त इधर सुनिये – वर्तमान में सत्ता फँस चुकी है क्योंकि इनके ख़ुद के खेमे के लोग ही इनके विरुद्ध हैं और विपक्ष तो कब से मुद्दा बना ही रहा है। क़ायदे में अधिकारियों पर आज संटी फेरी जाएँ मीटिंग में क्योंकि इनकी वजह से लोगों को वाजिब हक़ नहीं मिला और जिन्हें इन्होंने दिया अब वो भी अधर में हैं।
सरकार अगर DB का order follow करेगी तो कम से कम दस हज़ार लोग बाहर होंगे यहीं के यहीं इसलिए सीधा सा ये है सर्वजन हिताए सर्वजन सुखाए के लिए दिल्ली जाए बीच का रास्ता वहीं से निकलेगा बाक़ी समायोजन आदि की बात लपड़झंडिस type हैं ये सब नही होगा।
एक बात और list का जिन्न अधिकारी भी यहाँ cm के सामने नहीं निकालेंगे क्योंकि फिर जिले के आरक्षण को state level के आरक्षण से कैसे सिद्ध कर पाएँगे?
मैं बार बार कहता हूँ सबकुछ legally सही हो या फिर अधिक अधिक से लोग नौकरी पाएँ लेकिन अब ये बुरे फँस गए हैं, कोई भी वर्ग ख़ुश न हो क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का कोई ठिकाना नही है कह दे कि हाँ जो कर रहे हैं करते रहें बाक़ी के लिए भविष्य में कोई व्यवस्था बना दे या हो सकता है कह दे बाहर करो और list prepare करो।
फ़िलहाल सरकार सुप्रीम कोर्ट नहीं गई तो नियुक्त लोगों का अहित होगा क्योंकि basically सुप्रीम कोर्ट appellants को देखता है और जब वहाँ नियोक्ता नही होगा तो मुश्किल तो होगी ही।
बाक़ी 6800 वालों का अब सूरज उग गया है ख़ैर मेरी ये बात बाद में समझ आएगी आपको
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