शिक्षकों को प्रोन्नत वेतनमान और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति की मांग तेज, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बनाई रणनीति – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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लखनऊ। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश की प्रदेश संचालन समिति एवं साधारण सभा की बैठक में शिक्षकों की विभिन्न लंबित समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में शिक्षकों को प्रोन्नत वेतनमान, गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति, स्थानांतरण, अवकाश तथा अन्य सेवा संबंधी मांगों के समाधान के लिए आगे की रणनीति तैयार की गई।

बैठक का आयोजन रविवार को सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, अलीगंज (लखनऊ) में किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष प्रो. संजय मेघावी ने की।

टीईटी मामले पर भी हुई चर्चा

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार ने बैठक में बताया कि टीईटी (Teacher Eligibility Test) से जुड़े मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि मंत्री की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि टीईटी के कारण किसी भी शिक्षक की नौकरी प्रभावित नहीं होगी।

27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों का मुद्दा उठाया

प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह ने कहा कि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त कराने के लिए संगठन लगातार प्रयास कर रहा है। इस संबंध में संगठन 5 जुलाई तक सांसदों से संपर्क कर शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम में आवश्यक संशोधन अथवा विशेष प्रावधान की मांग करेगा।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें

बैठक में शिक्षकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इनमें शामिल हैं—

  • प्रोन्नत वेतनमान का लाभ शीघ्र प्रदान किया जाए।
  • शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए।
  • स्थानांतरण नीति को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
  • अवकाश एवं अन्य सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाए।
  • टीईटी संबंधी विवाद का स्थायी समाधान निकाला जाए।

कई पदाधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. कमल कौशिक, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. उदयन मिश्र, डॉ. निर्मला यादव, डॉ. अवनीश सिंह, मंत्री प्रो. अनिल कुमार सहित संगठन के कई पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

संगठन का उद्देश्य

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का कहना है कि शिक्षकों को अनावश्यक गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर उन्हें पूरी तरह शिक्षण कार्य पर केंद्रित किया जाए। साथ ही सेवा संबंधी लंबित समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से पक्ष रखा जाएगा।

नोट: बैठक में व्यक्त टीईटी संबंधी बातें संगठन के प्रतिनिधियों के बयान और मांगों पर आधारित हैं। इस विषय पर अंतिम कानूनी स्थिति न्यायालय के निर्णय और सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार ही निर्धारित होगी।

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